मेरठ

सरहद पार से कंट्रोल हो रहे थे कैमरे? जासूसी नेटवर्क के खुलासे के बाद छावनी में सर्च ऑपरेशन

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सैन्य ठिकानों और छावनी क्षेत्रों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के लिए रेकी करने वाले 'सुहेल गैंग' के खुलासे के बाद हड़कंप मचा हुआ है।

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Mar 24, 2026
प्रतीकात्मक फोटो: AI

दिल्ली और सोनीपत में सेना के मूवमेंट की निगरानी के लिए अवैध सोलर कैमरे लगाए जाने की बात सामने आने के बाद अब मेरठ कैंट, सैन्य क्षेत्र और छावनी के आसपास लगे हर एक कैमरे की कुंडली खंगाली जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे वेस्ट यूपी में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और संदिग्ध कैमरों को लेकर व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

रडार पर रेलवे स्टेशन और सैन्य इलाके

खुफिया विभाग और पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि कहीं मेरठ के संवेदनशील इलाकों में भी तो सोलर कैमरे नहीं लगाए गए? छानबीन का मुख्य केंद्र मेरठ कैंट रेलवे स्टेशन और उसके आसपास का सैन्य क्षेत्र है। जांच टीमें यह पता लगा रही हैं कि सार्वजनिक और निजी स्थानों पर लगे कैमरे किसने लगवाए, उनका कंट्रोल रूम कहां है और उनकी रिकॉर्डिंग कितने दिनों तक सुरक्षित रहती है। इस ऑपरेशन में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी की भी मदद ली जा रही है ताकि स्टेशनों पर होने वाली हर गतिविधि की बारीकी से जांच हो सके।

सुहेल गैंग का 'डिजिटल जाल' और हनीट्रैप का एंगल

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि सुहेल गैंग ने दिल्ली और सोनीपत में बेहद शातिराना तरीके से सोलर कैमरे फिट किए थे ताकि बिजली की जरूरत न पड़े और सेना की आवाजाही पर 24 घंटे नजर रखी जा सके। इस साजिश में संभल की रहने वाली इरम उर्फ महक की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। इरम पर आरोप है कि वह न केवल हनीट्रैप का जाल बिछा रही थी, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए किशोरों और युवकों को अपने जाल में फंसा रही थी।

'सरकारी काम' के नाम पर युवाओं को बनाया मोहरा

इरम और सुहेल का काम करने का तरीका बेहद शातिराना था। वे युवाओं को अच्छी नौकरी और काम दिलाने का लालच देते थे। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि इन युवाओं को यह झूठ बोला जाता था कि कैमरे लगाने का काम 'सरकार' की ओर से कराया जा रहा है। देशप्रेम के नाम पर या सरकारी प्रोजेक्ट का झांसा देकर ये लोग निर्दोष युवाओं से सैन्य क्षेत्रों में कैमरे लगवाते थे, जिनका सीधा एक्सेस सरहद पार बैठे हैंडलर्स के पास होता था।

सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी चुनौती

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मेरठ क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां सेना की बड़ी छावनी और महत्वपूर्ण इकाइयां हैं। ऐसे में बिना अनुमति के कैमरों का जाल बिछाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां इरम के मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया अकाउंट्स को खंगाल रही हैं ताकि उन युवतियों और युवकों की पहचान की जा सके जो इस जासूसी नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं या बनने वाले थे।

Published on:
24 Mar 2026 10:20 am
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