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मेरठ में ISI का बड़ा जासूसी नेटवर्क बेनकाब, सोशल मीडिया से चल रहा था पाकिस्तान का खतरनाक खेल, ऐसे हुआ खुलासा

मेरठ और आसपास के इलाकों में पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। सोशल मीडिया के जरिए युवाओं और नाबालिगों को जोड़कर मंदिरों और सैन्य ठिकानों की जानकारी भेजी जा रही थी।

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मेरठ

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Anuj Singh

Mar 21, 2026

मेरठ में ISI का बड़ा जासूसी नेटवर्क बेनकाब!

मेरठ में ISI का बड़ा जासूसी नेटवर्क बेनकाब!

Meerut News: पाकिस्तान के गैंगस्टर शहजाद भट्टी और सरदार उर्फ सरफराज ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके उत्तर भारत में एक बड़ा जासूसी नेटवर्क बनाया। यह नेटवर्क खासकर मेरठ और आसपास के इलाकों में फैला था। इसमें कई युवा और यहां तक कि नाबालिग बच्चे भी शामिल किए गए थे। इन लोगों की मदद से मंदिरों और सैन्य ठिकानों की जानकारी पाकिस्तान भेजी जा रही थी। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से मंदिरों में होने वाले बड़े विस्फोट की साजिश नाकाम हो गई।

आईएसआई से जुड़े पाकिस्तानी हैंडलर

पुलिस पूछताछ में पता चला कि शहजाद भट्टी और सरदार उर्फ सरफराज पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने यूट्यूब और टेलीग्राम चैनलों के जरिए दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में स्लीपर सेल तैयार किए। इन चैनलों से लोगों को संपर्क किया जाता था और उन्हें जासूसी का काम सौंपा जाता था। इनके जरिए मंदिरों, सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण जगहों की वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजी जा रही थीं। शहजाद भट्टी ने खुद भारत में इस नेटवर्क को विस्फोटक सामग्री भी उपलब्ध कराई थी। इनका प्लान किसी खास मौके पर बड़े विस्फोट करने का था।

अंबाला में पहली बड़ी गिरफ्तारी

13 मार्च को अंबाला एसटीएफ ने बराड़ा के पास तीन युवकों को दो किलो विस्फोटक के साथ पकड़ा। इनमें अंबाला के जंगवीर, अजमेर के अली अकबर और मेरठ के लिसाड़ी गेट निवासी अनस शामिल थे। अनस दो साल पहले चंडीगढ़ में सब्जी बेचता था। वहां पाकिस्तानी आतंकियों के नेटवर्क से जुड़ गया। अनस की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ से कई नए नाम सामने आए।

गाजियाबाद और बिजनौर में छापेमारी

15 मार्च को गाजियाबाद की कौशांबी पुलिस ने बिजनौर जिले के सुहैल मलिक उर्फ रोमियो, संभल की साने इरम उर्फ महक और अन्य चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। महक पाकिस्तान में बैठे आकाओं से सीधे संपर्क में थी। इन लोगों ने जासूसी के लिए दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे लगा दिए थे। सुहैल मलिक परतापुर के पास रहता था और सरदार उर्फ सरफराज से व्हाट्सएप पर बात करता था।

आजाद राजपूत की गिरफ्तारी

17 मार्च को एटीएस ने मेरठ के परतापुर टोल प्लाजा के पास आजाद राजपूत (जई गांव) को पकड़ा। आजाद दिल्ली से मेरठ आ रहा था। वह खुद को किसी राजनीतिक दल से जुड़ा बताता था, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई। आजाद अपने मामा अजीम राणा के संपर्क में था। आजाद के फोन में शहजाद भट्टी से वीडियो कॉल मिली। उसने ज्यादातर चैट डिलीट कर दी थीं, लेकिन अजीम राणा के फोन से कई चैट और वीडियो पुलिस को मिले।

मेरठ में और गिरफ्तारियां

20 मार्च को गाजियाबाद एसआईटी ने मेरठ के परतापुर निवासी गणेश, शास्त्रीनगर के गगन कुमार और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें पांच नाबालिग भी थे। इन लोगों ने दिल्ली कैंट और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी लगाए थे। गणेश और सुहैल मलिक पुणे में मिले थे। आरोपियों का प्लान 50 से ज्यादा जगहों पर सीसीटीवी लगाने का था, जिसमें मेरठ के महत्वपूर्ण स्थान भी शामिल थे।

पुलिस और एटीएस अलर्ट पर

मेरठ में लगातार गिरफ्तारियों से एटीएस, पुलिस और खुफिया विभाग पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। जांच जारी है और नेटवर्क के और सदस्यों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है। यह पूरा मामला देश की सुरक्षा के लिए बहुत गंभीर है।