
मेरठ से करीब 35 किलोमीटर बसे हस्तिनापुर के खादर में गांव तारापुर है। इस गांव में महंत सागर गिरी महाराज का आश्रम है। महंत आश्रम गांव के बाहर जंगल के बीचों-बीच स्थित है।
महंत के आश्रम में आसपास के लोग जाने से डरते हैं। डरने का कारण आश्रम में रहने वाले नेवले हैं। महंत और नेवलों की दोस्ती के किस्से आसपास मशहूर हैं।
12 साल पुरानी महंत और नेवलों की दोस्ती
सागर कुटी के महंत सागर गिरी महाराज की नेवलों से दोस्ती 12 साल पुरानी है। आश्रम में रहने वाले नेवले अपने गुरु की तरह ही महाराज की सुरक्षा करते हैं।
आश्रम में सांपों का डेरा
श्री श्री 108 सागर गिरी जूना अखाड़ा करीब 20 साल से है। इनके आश्रम में रहने वाले नेवले दुर्लभ प्रजाति के हैं। कहते हैं नेवलों से पहले आश्रम में सांपों का डेरा हुआ करता था।
आए दिन सांप के निकलने की घटनाएं होती थी। लेकिन जब से आश्रम में नेवलों ने रहना शुरू किया है, यहां से सांप गायब हो गए हैं। आश्रम ही नहीं आसपास के इलाकों में भी सांप नहीं दिखाई देते हैं।
गंगा की बाढ़ में बहकर आए थे नेवले
जंगल में रहने वाले दुर्लभ प्रजाति के ये नेवले 2010 में खादर में आई गंगा की बाढ़ में बहकर आश्रम में आए थे। इन नेवलों की रक्षा महंत ने की थी। उसके बाद से ही ये नेवले आश्रम में रहने लगे।
इन नेवलों का कुनबा अब काफी बढ़ गया है। बाढ़ के कारण जंगली जीव भी जान बचाने के लिए भटके थे। सागर महाराज बताते हैं कि उनकी कुटी के चारों ओर चार से पांच फीट पानी भरा था। उसी पानी में आधा दर्जन नेवले बहते हुए कुटी के पास पहुंचे।
जिन्हें देखते हुए महंत ने उन्हें अपनी कुटी में शरण दी थी। नेवलों को खाने के लिए उन्होंने भोजन भी दिया था। उसके बाद से ये नेवले उनके साथ ही रहते हैं।