धरने पर बैठीं प्रियंका गांधी से किसी तरह मिलने पहुंच गयीं पीड़ित परिवारों की कुछ महिलाएं।
मिर्जापुर. दो दिन पहले सोनभद्र में जमीन पर कब्जे के लिये 10 लोगों की बर्बरता पूर्वक हत्या के बाद उनके परिवारों से मिलने जा रहीं प्रियंका गांधी को प्रशासन ने चुनार में हिरासत में ले लिया। फिर जब पीड़ित के परिजन खुद किसी तरह प्रियंका से मिलने पहुंचे तो उन्हें भी मिलने से रोक दिया गया। इसके बाद गुस्से में आयीं प्रियिंका गांधी ने कार्यकर्ताओं का घेरा बनाकर पुलिस घेरे को तोड़ते हुए आगे बढ़ीं और धरने पर बैठ गयीं। इस बीच किसी तरह से पीड़ित परिवार की कुछ महिलाएं उनतक पहुंचने में कामयाब हुईं। प्रियंका से मिलते ही पीड़ित परिवार की महिलाओं की आंखों से आंसू छलक पड़े वो प्रियंका की गोद में सर रखकर रोने लगीं। प्रियंका ने उनको गले लगाया और उनके आंसू पोंछे।
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प्रियंका गांधी ने शनिवार को भी यह साफ कर दिया कि वो बिना पीड़ित परिवारों से मिले किसी कीमत पर वापस नहीं लौटेंगी, उन्होंने प्रशासन और सरकार को चैलेंज भी किया, कि अगर चाहे तो उन्हें जेल भेज दिया जाए, पर वह पीछे नहीं हटेंगी। इसके बाद वहां की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गयी। इसी बीच दोपहर करीब 11 बजे के आस-पास अचानक ही पीड़ित परिवार के दो सदस्य अंदर पहुंचे और बताया कि वो पीड़ित परिवार से हैं उनके मुताबिक पीड़ित परिवारों से कुल 15 सदस्य उनसे मिलने आए हैं और बाहर खड़े हैं। वह उनसे मिलने के लिये बढ़ीं और तभी इसकी भनक प्रशासन को लग गयी और प्रियंका गांधी अंदर ही रोक दी गयीं। सुरक्षाकर्मियों से प्रियंका गांधी की नोंक-झोंक भी हुई। इस बीच अंदर आने की कोशिश कर रहे पीड़ित परिवार के सदस्यों को भी बाहर ही रोक दिया गया। प्रियंका को रोके जाने की खबर लगी तो बाहर गेट पर कांग्रेसी भी हंगामा करने लगे।
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प्रशासन के इस रवैये से नाराज प्रियंका गांधी ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया और कार्यकर्ताओं का घेरा बनाकर आगे बढ़ने लगीं, कुछ आगे बढीं, उसके बाद एक पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गयीं। इस बीच किसी तरह से पीड़ित परिवार की कुछ और महिलाएं वहां उनसे मिलने पहुंचीं। प्रियंका से मिलकर वह फफक पड़ीं। रोते-रोते महिलाओं ने प्रियंका गांधी को उस दिन की दहशत और खौफ की दास्तान सुनायी। महिलाएं प्रियंका की गोद में सर रखकर रोती रहीं और प्रियंका उनके आंसू पोंछती रहीं। उन्होंने पीड़ित महिलाओं को गले से लगाकर उन्हें ढाढस बंधाया।