सोनभद्र जिले की रहने वाली एक युवती को मंदिर से उठाकर दस नकाबपोशों ने किया था दुष्कर्म
मिर्जापुर. दुष्कर्म पीड़िता मेडिकल जांच कराने के लिए मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल लाया गया था। लेकिन लापरवाही तो देखिए की दो सौ किलोमीटर से चलकर पीड़िता मिर्जापुर के अस्पताल पहुंची लेकिन उसका मेडिकल करना के लिए उसे डाक्टरों के पांच घंटे तक हाथ जोड़ने पड़े। इतना ही नहीं जिस डाक्टर के पास इस युवती को मेडिकल के लिए रेफर किया गया था वो अस्पताल ही नहीं आई।
बड़ी देर के बाद जब इसकी खबर मीडिया को लगी तो सीएमओ साहब हैरान हो गये। वो महिला डाक्टरों से निवेदन करते रहे है कि इस युवती का मेडिकल करा दो लेकिन इसके बावजूद भी युवती को पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ा। वो महिला डाक्टरों अपना मेडिकल कराने के लिए हाथ जोड़ती रही लेकिन उसके साथ इतनी बड़ी हैवानियत होने के बाद भी धरती के भगवान कहे जाने वाले डाक्टरों ने एक न सुनी।
जी हां दो दिन पहले सोनभद्र जिले की रहने वाली एक महिला ने पुलिस में तहरीर दिया था कि वो झिंगुरदह स्थित एक मंदिर में अपने होने वाले पति के साथ हनुमान जी का दर्शन करने पहुंची थी। दस नकाबपोश बदमाश चाकू की नोंक पर उठाकर उसे जंगल ले गये। उसके मंगेतर को पेड़ से बांध दिया और उसके साथ दसों ने दुष्कर्म किया था। इस युवती और युवक दोनों की सगाई कुछ दिन पहले हुई थी। दोनों का विवाह होना था।
दोनों पुलिस स्टेशन पहुंचे और पुलिस को आपबीती बताई। मामला गंभीर होने की वजह से प्रशासन के हाथ-पांव फूल गये। पुलिस अधीक्षक ने सीओ को मामले की जांच में लगाकर रिपोर्ट देने को कहा। पुलिस और प्रशासन ने इस मामले की मेडिकल रिपोर्ट कराने के लिए पुलिस टीम से साथ युवती को रविवार को ही मिर्जापुर मंडलीय अस्रताल भेज दिया। अनपरा से 200 किलोमीटर की यात्रा कर मिर्जापुर पहुंची रेप पीड़िता का मेडिकल डॉक्टर शिल्पी केशरवानी को करना था। लेकिन जैसे ही वो पहुंची शिल्पी अपना फोन बंड कर वहां से गायब हो गई।
दोपहरे के 12 बजे पहुंची पीड़िता के साथ पुलिस टीम ने भी डाक्टरों से भी मेडिकर कराने की गुहार लगाई। लेकिन किसी ने नहीं सुनी। तकरीबन तीन घंटे से भी ज्यादा का समय बीत जाने के बाद इसकी खबर मीडिया को लगी तो सब मंडलीय अस्पताल पहुंचने लगे। इसे देख सीएमओ प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक मानिक चंद गुप्ता ने महिला डाक्टरों का समझाया लेकिन बात नहीं बनी। तो सीएमओ यूएस लाल ने फोन पर डॉक्टर को दूसरे जनपद का मामला होने का हवाला दे कर मेडिकल करने के लिए कहा तो महिला डॉक्टर मेडिकल करने के लिए लिए तैयार हुई। इस तरह पांच घंटे के बाद के बाद किसी तरह से युवती का मेडिकल चेकअप कराया जा सका। सवाल तो ये है कि इस तरह से सरकारी विभागों की लापरवाही पर रोक आखिर कब लगेगी।