Highlights. - अब तक के सबसे पुराने व दुर्लभतम पादप सदृश्य मोलस्का जंतुओं के जीवाश्म मिले हैं - पहाड़ी पर लाखों की संख्या में ऐसे जीवाश्म इस बात का प्रमाण है कि जैसलमेर के पास छिछला समुद्र का वातावरण था - इस शोध के बाद अब जैसलमेर में मांसाहारी डायनासोर के जीवन, उत्पत्ति और विनाश के संबंध में अधिक प्रमाण मिलने की संभावनाएं बढ़ गई है

नई दिल्ली/जोधपुर।
जैसलमेर के थयात गांव की पहाडिय़ों पर विश्व के अब तक के सबसे पुराने व दुर्लभतम पादप सदृश्य मोलस्का जंतुओं के जीवाश्म मिले हैं, जो करीब 20 करोड़ साल पुराने हैं। पहाड़ी पर लाखों की संख्या में ऐसे जीवाश्म इस बात का प्रमाण है कि जैसलमेर के पास छिछला समुद्र का वातावरण था, जहां मांसाहारी डायनासोर विचरण किया करते थे।
मिल सकते हैं और अधिक प्रमाण
इस शोध के बाद अब जैसलमेर में मांसाहारी डायनासोर के जीवन, उत्पत्ति और विनाश के संबंध में अधिक प्रमाण मिलने की संभावनाएं बढ़ गई है। यह खुलासा जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के शोध में हुआ है। इसे 6 सितंबर को जियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया ने स्वीकृत कर लिया है।
पादप जैसे क्यों दिखते हैं जीवाश्म
ये जीवाश्म मोलस्का प्रकार के समुद्री जंतुओं के हैं। जीवाश्म को हिलीचनस एग्रीओनसिस नाम दिया गया है। ये 20 करोड़ साल पहले के जीवाश्म हैं। इससे पहले केवल क्रिटेशियस युग (14.5 से 6.5 करोड़ वर्ष पहले) में ही ऐसे जीवाश्म मिलते रहे हैं। मोलस्का के इन जीवों में दो कपाट वाला हृदय होता था। शत्रुओं से बचने के लिए ये जंतु आगे-पीछे, ऊपर-नीचे चलते थे। इनकी चाल के कारण चट्टानों पर पादप जैसी संरचनाएं बन जाती थी।
क्या है इनका महत्त्व
हिलीचनस एग्रीओनसिस इस बात का प्रमाण है कि जैसलमेर में जुरासिक युग में भारी सं या में मांसाहारी डायनोसोर रहा करते थे और समुद्री जीवों को वे भोजन के रूप में ग्रहण करते थे। वर्ष 2016 में इसी स्थान पर डायनोसार के दो फुट प्रिंट भी मिले थे।
यह खोज दुर्लभतम
थयात गांव में विश्व के सबसे पुराने व दुर्लभतम जीवाश्म मिले हैं जो यहां डायनोसोर पाए जाने की बड़ी सं या का संकेत देते हैं।’ - डॉ वीरेंद्र सिंह परिहार, जेएनवीयू जोधपुर