विविध भारत

ऊना कांड के एक साल बाद..गुजरात में दलितों पर फिर हुआ हमला

एक समुदाय विशेष के लोगों पर पीड़ित व्यक्ति और उसकी मां को 20 मिनट तक बेरहमी से पीटने का आरोप

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A year after Una incident once again Dalits beaten by a group

बड़ोदरा। गुजरात के ऊना में दलितों की पिटाई की घटना के एक साल बाद फिर एक समुदाय द्वारा एक आदमी और उसकी मां के साथ बेरहमी से पिटाई का मामला सामने आया है। आनंद जिले के कासर गांव में दरबार (क्षत्रिय) समुदाय के लोगों के एक समूह पर शैलेश रोहित (21) और मनीबेन (45) को शनिवाार की रात तकरीबन 20 मिनट तक पीटने का आरोप है। पीड़ित परिवार मरे हुए जानवरों की खाल उतारने का काम करता है। उन्होंने पहले गाली—गलौच किया और फिर तकरीबन 20 लोगों के साथ मिलकर डंडे से पिटाई की।

पांच लोगों के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत
इस घटना के शिकार शैलेश ने शनिवार रात पांच लोगों के नाम पर पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। शैलेश के मुताबिक दरबार समुदाय के लोगों ने पहले उसे मरे हुए जानवरों की खाल निकालने की धमकी दी थी। उनका कहना था कि इस काम के चलते उनके इलाके में बदबू आती है। इसके बाद उसने किसी तरह की पचड़े से बचने के लिए उसने अपना घर छोड़ दिया। लेकिन शनिवार की रात रोहितवास स्थित आवास पर अचानक से एक भीड़ ने उस पर हमला बोल दिया। रोहितवास में रहने वाले तकरीबन 25 परिवार मृत पशुओं की खाल उतार कर अपना गुजर—बसर करते हैं।

पीड़ित परिवार को 24 घंटे सुरक्षा
सोजित्रा पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 506 (2) के तहत तकरीबन 20 लोगों की एक भीड़ के साथ पांच लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया है। वहीं पुलिस ने धोलाभाई परमार, विजय फुला परमार, नरसिंहभाई परमार के छोटे बेटे, जैमन परमार और कौशिक परमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। खंबट के डीएसपी डी. डी. दामोर जो कि इस मामले की जांच कर रहे हैं, ने कहा कि "चूंकि आरोपियों के बारे में जानकारी अधूरी है, इसलिए हमने परिवार से मिलकर बाकी सात हमलावरों के बारे में जानकारी हासिल की है जो इस वक्त गांव से फरार हैं। दामोर के मुताबिक पुलिस ने पीड़ित परिवार को चौबीस घंटे सुरक्षा प्रदान की गई है।

गांव में है क्षत्रियों का बोलबाला
5,000 से अधिक परिवार वाले कसोर गांव में क्षत्रिय समुदाय का प्रभुत्व है। आनंद के दलित अत्याचार निवारण समिति के अध्यक्ष किरण सोलंकी के मुताबिक आनंद जिले के गांवों में दलितों के साथ भेदभाव और अत्याचार जारी है। खंभात शहर के सैयदपुरा और संडलपुरा उमरेठ गांवों के मंदिरों में दलितों को प्रवेश की इजाजत नहीं है।

Published on:
15 Aug 2017 01:06 pm
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