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मोदी सरकार ने पहली बार माना- नोटबंदी की वजह से देश के किसानों को हुआ बहुत नुकसान

नोटबंदी के दो साल बाद भी देश में इसे लेकर बहस जारी है। विपक्ष जहां इसकी आलोचना करता है, तो मोदी सरकार इसके दूरगामी फायदे गिना रही है। इसी बीच कृषि मंत्रालय की एक रिपोर्ट ने चौंकने वाला खुलासा किया है।
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Nov 21, 2018
demonetisation
मोदी सरकार ने माना- नोटबंदी की वजह से देश के 26 करोड़ किसानों पर पड़ा बुरा असर

नई दिल्ली।नोटबंदी के दो साल बाद मोदी सरकार ने पहली बार माना है कि नोटबंदी का देश के किसानों पर बुरा असर पड़ा है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने संसदीय समिति को भेजे गए जवाब में कहा है कि अचानक हुई नोटबंदी की वजह से लाखों किसान नकद की किल्लत से जूझने लगे थे। जिसकी वजह से वे सर्दियों की फसल के लिए बीज और खाद तक नहीं खरीद पाए थे। इसलिए उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

खरीदारी के लिए किसान के पास नहीं था पैसा

एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक मंगलवार को कृषि मंत्रालय, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय, श्रम-रोजगार मंत्रालय ने कांग्रेस सांसद विरप्पा मोहली की अगुवाई वाली संसद की स्थाई समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपी। जिसमें कहा गया है कि जब नोटबंदी हुई तब देश के किसान अपनी खरीफ की फसलों को बेचने और रबी की बुवाई की तैयारी में जुटे हुए थे। इन दोनों काम के लिए उन्हें अधिक तादात में नकद की जरुरत होती है। लेकिन अचानक हुई नोटबंदी की वजह से किसान के हाथ और बाजार से सारा कैश खत्म हो गया।

देश के 26 करोड़ किसान खरीदीरी के लिए नकद पर आश्रित

कृषि मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा है कि भारत में ज्यादातर( 26 करोड़ से भी ज्यादा) किसान नकद अर्थव्यवस्था पर आधारित हैं। नवंबर में हुई नोटबंदी की वजह से लाखों किसान रबी की फसल के लिए जरुरी खाद और बीज खरीद ही नहीं सके, क्योंकि उनके हाथ में नकद मौजूद नहीं था। ये परेशानी सिर्फ छोटे नहीं बल्कि जमींदारों को भी इसका सामना करना पड़ा, क्योंकि खेतों में काम करने वाले किसानों को हर रोज मजदूरी नकद ही देनी होतची है। ऐसे में न ही खरीदारी हो पाई और न ही खेती।

पीएम की 'कड़वी दवाई' वाले बयान के बाद आई रिपोर्ट

बता दें कि नोटबंदी पर कृषि मंत्रालय की ये चौंकाने वाली रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झाबुआ रैली के बाद आई है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए झाबुआ पहुंचे पीएम मोदी ने एक रैली में कांग्रेस पर जमकर हमला बोला था। यहीं उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दीमक को मिटाने के लिए 'जहरीली दवाई' की जरुरत होती है, ठीक उसी तरह कांग्रेस के कालखंड में फैले भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए नोटबंदी जैसी 'कड़वी दवाई' का इस्तेमाल करना पड़ा।

नहीं बिक सके 1.38 लाख क्विटंल गेंहू के बीज

मंत्रालय की रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा है कि नोटंबदी के बाद नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन 1.38 लाख क्विटंल गेंहू के बीज नहीं बेच पाए थे, क्योंकि इनकी खरीदारी के लिए भी पैसे की जरुरत होती है और सरकार ने 8 नवंबर 2016 की रात 12 बजे से ही एक हजार और पांच सौ रुपए के नोटों को चलन से बाहर कर दिया था।

Published on:
21 Nov 2018 04:46 pm
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