भाजपा की कोशिश होगी कि विपक्षी पार्टियां मिलकर भी बहुमत के लिए जरूरी 112 सदस्यों का समर्थन पत्र राज्यपाल को न दे सकें।
नई दिल्ली। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में किसी भी राजनीतिक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में नई सरकार बनाने को लेकर मुश्किलें आ सकती हैं। इस चुनाव मे भाजपा 104 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई है। वहीं कांग्रेस 78 सीटों पर सिमट गई है। भाजपा के येदियुरप्पा नेतृत्व ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। येदियुरप्पा का कहना कि वह गुरुवार को राज्यपाल वजुभाई से मुलाकात करके मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और जेडीएस मिलकर सरकार बनाने का दावा कर रही हैं। ऐसे में भाजपा की कोशिश होगी कि विपक्षी पार्टियां मिलकर भी बहुमत के लिए जरूरी 112 सदस्यों का समर्थन पत्र राज्यपाल को न दे सकें। इसके लिए जोड़तोड़ की राजनीति शुरू हो चुकी है।
चार विधायक बैठक में नहीं पहुंचे
कांग्रेस विधायक दल की बैठक में बुधवार को पार्टी के चार विधायक नहीं पहुंच सके। इसके अलावा जेडीएस के दो विधायक भी अपनी पार्टी की बैठक से गायब रहे। इन विधायकों के बीजेपी के संपर्क में होने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही एक निर्दलीय विधायक ने भी बीजेपी को समर्थन दिया है। वहीं, कुमारस्वामी ने दो विधानसभा सीटों से विजय हासिल की है। लिहाजा बीजेपी राज्यपाल के जरिए दबाव बनाएगी कि कुमारस्वामी विश्वास मत से पहले दो में से एक सीट से इस्तीफा दें। बीजेपी चाहती है कि कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला सबसे बड़ी पार्टी यानी बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता और विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए वक्त दें।
लिंगायत विधायकों को तोड़ने की चाल
भाजपा की कोशिश है कि लिंगायत सम्मान को मुद्दा बनाया जाए। वह लिंगायत विधायकों के संपर्क में है। भाजपा में येदियुरप्पा भी लिंगायत समुदाय से आते हैं। ऐसे में वह इन विधायकों को साधने की कोशिश करेंगे। इस बार कांग्रेस के 21 और जेडीएस के 10 विधायक लिंगायत समुदाय से हैं। इसके अलावा भाजपा विधानसभा में विश्वास मत के दौरान कांग्रेस और जेडीएस के कम से कम 15 विधायकों को गैरहाजिर रखने की योजना बना रही है। इससे सदन में संख्या बल 222 से घटकर 207 हो जाएगा। इसके बाद बीजेपी अपने 104 विधायकों के दम पर आसानी से बहुमत साबित कर लेगी। इससे बहुमत का आंकड़ा 112 से घटकर 104 पर आ जाएगा।