कावेरी जल विवाद को लेकर अभी तक कोई कार्ययोजना तैयार नहीं होने के कारण फैसले में हो रही है देरी ।
नई दिल्ली। सु्प्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि यह कोर्ट की अवमानना है कि उसने कावेरी जल विवाद को लेकर अभी तक कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की है। गौरतलब है कि कावेरी नदी के पानी का बंटवारा तमिलनाडु,कर्नाटका,केरल और पुंडुचेरी के बीच होना था। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस हालात में पहले दिए गए फैसले को ही लागू किया जाना चाहिए।
व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया
अदालत ने केंद्रीय जल संसाधन सचिव को 14 मई को सुबह 10.30 बजे अदालत में कावेरी जल साझाकरण तंत्र और पर्यवेक्षण प्राधिकरण पर मसौदा योजना के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया। इस मामले में कार्ययोजना में देरी को लेकर वकील शेखर नाफाडे ने पीएम मोदी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पीएम दावा करते हैं कि नागरिकों के लिए वह हर समय काम करते हैं, तो इस काम में देरी कैसे हो गई।
कावेरी नदी से तमिलनाडु को अधिक पानी
इससे पहले कर्नाटक सरकार ने सोमवार को शीर्ष अदालत के समक्ष एक हलफनामा दायर किया था,जिसमें दावा किया गया था कि वह इसका उत्तराधिकारी है, मगर कावेरी नदी से तमिलनाडु तक अधिक पानी जारी किया था। कर्नाटक सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने तमिलनाडु को अप्रैल में कावेरी नदी से निर्धारित हिस्से से अधिक मात्रा में पानी दिया है। कर्नाटक सरकार ने एक हलफनामा दायर करके कहा है कि उसने अप्रैल 2018 में तमिलनाडु को 116.7 टीएमसी फीट पानी दिया है, जो उसकी निर्धारित सीमा से 16.66 टीएमसी फीट अधिक है। तीन मई को शीर्ष कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को हलफनामा दायर करके यह बताने को कहा था कि अभी तक उसने तमिलनाडु को कावेरी नदी से कितना पानी दिया है।
पीएम कर्नाटक चुनाव में व्यस्त
अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दलील दी थी कि कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड से संबंधित योजना के मसौदे को अभी अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है, क्योंकि प्रधानमंत्री और अन्य मंत्री कर्नाटक चुनाव में व्यस्त हैं। गौरतलब है कि कावेरी के जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों में विवाद चल रहा है।