Highlights. - केंद्र सरकार भी संबंधित राज्य की सहमति के बिना सीबीआइ जांच को मंजूरी नहीं दे सकती - कोर्ट ने यह फैसला उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई में दिया - सीबीआइ जांच को लेकर 8 राज्य सामान्य सहमति पहले ही वापस ले चुके हैं
नई दिल्ली.
सीबीआइ की छानबीन के अधिकार क्षेत्र, विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि सीबीआइ बिना राज्य सरकार की अनुमति के जांच शुरू नहीं कर सकती। यही नहीं, केंद्र सरकार भी संबंधित राज्य की सहमति के बिना सीबीआइ जांच को मंजूरी नहीं दे सकती है। कोर्ट ने यह फैसला उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई में दिया।
सीबीआइ जांच को लेकर 8 राज्य सामान्य सहमति पहले ही वापस ले चुके हैं। इनमें राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब और मिजोरम हैं। गौरतलब है कि इन राज्यों में गैर भाजपाई दलों की सरकारें हैं।
क्या है पूरा मामला
फर्टिको मार्केटिंग एंड इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड की फैक्ट्री में सीबीआइ ने छापेमारी की थी। कोल इंडिया लिमिटेड के साथ समझौते के तहत खरीदे गए कोयले की कालाबाजारी में राज्य के दो अधिकारी लिप्त पाए गए। उन्हीं अधिकारियों ने सीबीआइ जांच को चुनौती देते हुए याचिका लगाई थी।
जांच की इजाजत राज्य सरकार का अधिकार
जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने डीएसपीई एक्ट के हवाला से कहा कि धारा-5 से केंद्र सरकार को राज्यों में सीबीआइ जांच का तो अधिकार है, लेकिन धारा-6 के तहत राज्य को अपने क्षेत्र में जांच की इजाजत देने, न देने का अधिकार है।
छत्तीसगढ़: उठाया सवाल विश्वसनीयता पर
वर्ष 2019 में सीबीआइ से जनरल कन्सेंट वापस लिया था। सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि सीबीआइ की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां जग्गी हत्याकांड, सीडी कांड, एसईसीएल कोल घोटाला, आइएएस बीएल अग्रवाल रिश्वत कांड, बिलासपुर के पत्रकार सुशील पाठक, भिलाई मैगनीज कांड की जांच चल रही है।
राजस्थान: खरीद-फरोख्त का ऑडियो
जुलाई 2020 में राजस्थान की गहलोत सरकार को गिराने की साजिश का ऑडियो वायरल हुआ था। इसमें विधायकों की खरीद-फरोख्त पर कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की आवाज का दावा था। गहलोत सरकार ने सीबीआइ से जनरल कन्सेंट वापस ले लिया।
प. बंगाल: जब अफसरों को हिरासत में लिया
साल 2019 में केंद्र व ममता बनर्जी के बीच तकरार के बाद सीबीआइ से जनरल कन्सेंट वापस लिया था। चिटफंड घोटाले की जांच में सीबीआइ व बंगाल पुलिस आमने-सामने हो गई थी। सीबीआइ अधिकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा।
टकराव की आशंका
सीबीआइ के दुरुपयोग के आरोपों के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला महत्वपूर्ण माना जा सकता है। लेकिन इससे केंद्र और गैर भाजपा शासित राज्यों के बीच टकराव बढऩे की आशंका प्रबल होती है। राज्यों की सहमति जरूरी होने पर भ्रष्टाचार के मामलों में जांच कमजोर पड़ सकती है। राज्यों की अनुमति में लगने वाला समय पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोपों को गहरा बना सकता है। जरूरत इसे सियासी मुद्दा बनाने से बचने की है। सीबीआइ की सार्थकता तभी साबित हो पाएगी।