देश में जुलाई के बाद पहली बार भारत में कोविड के सबसे कम मामले दर्ज केंद्र सरकार की घोषणा- बच्चों को कोरोना वैक्सीन की जरूरत नहीं
नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस ( Coronavirus in india ) के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हालांकि जुलाई के बाद पहली बार भारत में कोविड ( Coronavirus Case in India ) के सबसे कम मामले दर्ज किए गए। मंगलवार को देश में कोविड-19 के 19,556 नए मामले सामने आए, जिसके बाद कुल मामलों की संख्या 1,00,75,116 हो गई। इस बीच केंद्र सरकार की ओर से बड़ी घोषणा की गई है। केंद्र ने कहा है कि बच्चों को कोरोना वैक्सीन की जरूरत नहीं है। नीति आयोग (Niti Aayog) के सदस्य डॉ वी के पॉल (Dr VK Paul) ने जानकारी देते हुए बताया कि इंटरनेशनल गाइडलाइन के अनुसार बच्चों को अभी कोरोना वैक्सीन की जरूरत नहीं है।
बीमारी ज्यादा उम्र के लोगों में अधिक देखने को मिली
आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने शुरुआती दौर में देश में 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन देने का टारगेट रखा है। सबसे पहले जिन लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाई जाएगी, उनमें स्वास्थ्यकर्मियों, सुरक्षाकर्मियों और गम्भीर बीमारी से पीड़ित लोगों को रखा जाएगा। वीके पॉल ने कहा कि यह बीमारी ज्यादा उम्र के लोगों में अधिक देखने को मिली है। अभी तक मिली हिस्ट्री देखते हुए बच्चों को वैक्सीन देने का कोई आधार नहीं बनता। कोरोना वैक्सीन के ट्रायल भी 18 साल से अधिक उम्र के लोगों पर ही किए गए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया से बात कर रहे पॉल ने कहा कि ब्रिटेन में मिले नए कोरोना वायरस से वैक्सीन के डवलपमेंट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इलाज को लेकर जारी दिशा निर्देश में अभी कोई बदलाव नहीं
पॉल ने कहा कि ब्रिटेन में मिले न? कोरोना वायरस ? से घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, बस बचाव के लिए सावधानी व सतर्कता बरतनी है। उन्होंने कहा कि नए कोरोना वायरस को ध्यान में रखते हुए इलाज को लेकर जारी दिशा निर्देश में अभी कोई बदलाव नहीं किया गया है। पॉल ने कोरोना वैक्सीन पर कोरोना के नए स्ट्रेन के पड़ने वाले असर की बात को भी नकार दिया।
रिकवरी रेट 95.65 फीसदी
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों से ये जानकारी मिली है। देश में पिछले 24 घंटों में 30,376 मरीज इस बीमारी से ठीक हुए। इसके साथ ही ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 96,36,487 हो गई है। फिलहाल देश में 2,92,518 मरीज सक्रिय रूप से संक्रमित हैं। रिकवरी रेट 95.65 फीसदी है, जबकि मृत्यु दर 1.45 प्रतिशत है।