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दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नई पहल, पेपरलेस हुआ कोर्टरूम

Chief Justice की वजह से Courtroom of Delhi High Court Paperless दिल्ली हाईकोर्ट का कोर्ट नंबर-1 बना ई कोर्ट CJ DN Patel के चार्ज संभालने के बाद पेपरलेस हुआ कोर्ट
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Updated: 7 Jul 2019, 4:23 PM IST
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नई दिल्ली। कागज की मांग की वजह से पेड़ों की कटाई लगातार जारी है। लेकिन पेड़ों की कमी की वजह से हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। पूरी दुनिया में कागजों के कम प्रयोग की अपील की जारी है। ऐस में दिल्ली उच्च न्यायालय ने नई पहल करते हुए कोर्ट नंबर 1 को पूरी तरह से पेपरलेस ( Courtroom of Delhi High Court Paperless ) कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट को कागजों के जंजाल से मुक्त करने के पीछे नए चीफ जस्टिस डी एन पटेल का हाथ है।

डी एन पटेल ( CJ DN Patel ) की वजह से हाई कोर्ट का कोर्ट नंबर-1 'ई कोर्ट' बन गया है। बता दें कि कोर्ट नंबर-1 से पहले हाईकोर्ट के कर्मशल कोर्ट और कुछ सिंगल बेंच के कोर्ट आंशिक या पूर्ण रूप से पेपरलेस थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले महीने चीफ जस्टिस ने चार्ज संभालने के बाद कोर्ट को पेपरलेस बनाने में लग गए थे। लेकिन अब जाकर उन्हें सफलता हाथ लगी है।

कोर्ट नंबर 1 को पेपरलेस करना बड़ी चुनौती

मीडिया रिपोर्ट की माने तो हाईकोर्ट के कोर्ट नंबर-1 ( Courtroom of Delhi High Court Paperless ) को पेपर लेस करना एक बड़ी चुनौती थी। दरअसल, इस कोर्ट में कई तरह के केस पर सुनवाई होती है। यहां काम ता बोझ अन्य कोर्ट की तुलना में ज्यादा है।

प्राप्त जानकरी के मुताबिक , इस कोर्ट में जनहित याचिकाएं, नए कानूनों और नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं, टैक्स केस,पत्र पेटेंट अपील ( एलपीए ), और कर्मशल अपील कई तरह के केस आते हैं।

ऐसे में इस कोर्ट का पेपरलेस ( Courtroom of Delhi High Court Paperless ) होना बड़ी बात है। दिल्ली हाईकोर्ट के सबसे व्यस्थ कोर्ट के पेपरलेस होने के बाद बाकी बचे अन्य कोर्टों और बेंचों को इस ओर ध्यान देने की ज्यादा जरुरत है। इसके अलावा कोर्ट के डिजिटलाइजेशन को लेकर भी लगातार बात चल रही है।

SC अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं में भी देगा जजमेंट

अभी हाल ही खबर आई थी की सुप्रीम कोर्ट अब जल्द ही अंग्रेजी क अलावा अन्य भाषाओं में भी अपना फैसला देगा। बता दें कि इस महीने SC के जजमेंट हिन्दी, उड़िया, असमिया, कन्नड़, मराठी और तेलुगू भाषाओं में भी ट्रांसलेट किया जाएगा। इसके बाद तमिल समेत अन्य भाषाओं में भी सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का अनुवाद होगा।

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7 Jul 2019, 4:23 PM IST
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