
नई दिल्ली। पूरा देश इन दिनों कोरोना वायरस (coronavirus) संकट से जूझ रहा है। पाबंदियों और लॉकडाउन के बावजूद देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वहीं, महाराष्ट्र ( coronavirus in Maharashtra ) में इस महामारी ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। हालांकि, Unlock के तहत धीरे-धीरे जनजीवन सामान्य हो रहा है। इधर, दिवाली के बाद महाराष्ट्र सरकार ने लोगों को बड़ी राहत दी है। आज से राज्य के सभी धार्मिक स्थलों को खोल दिया गया है। हालांकि, उसके साथ कई नियमों को भी लागू किया गया है, जिसे लोगों को सख्ती से पालन करना होगा।
महाराष्ट्र सरकार ने जारी किए गाइडलाइंस
जानकारी के मुताबिक, तकरीबन आठ महीने के बाद धार्मिक स्थलों को खोला गया है। मंदिर खुलते ही काफी संख्या में लोग भगवान के दर्शन के लिए पहुंचने लगे। इतना ही नहीं देश की आर्थिक राजधानी स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर को भी दोबारा खोल दिया गया है। लेकिन, मंदिर के अंदर प्रसाद चढ़ाने की इजाजत नहीं दी गई है। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष आदेश बांदेकर का कहना है कि हर घंटे केवल 100 श्रद्धालुओं को दर्शन करने की इजाजत है। दर्शन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। इसके अलावा एक घंटे में मंदिर को सेनेटाइज किया जा रहा है। पूरे दिन में केवल एक हजार ही श्रद्धालु मंदिर के अंदर प्रवेश कर सकते हैं।
इन नियमों का पालन करना अनिवार्य
सरकार ने गाइडलाइंस में कहा है कि हर श्रद्धालु को मंदिर के अंदर प्रवेश करने के लिए मास्क लगाना अनिवार्य होगा। इसके दो श्रद्धालुओं के बीच लाइन में कम से कम छह फीट की दूरी अनिवार्य है। वहीं, बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र के व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं और बीमार लोगों को मंदिर के अंदर प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा मंदिर के गेट पर सेनेटाइज और स्क्रीनिंग की सुविधा भी अनिवार्य है। इसके अलावा मंदिर कैंपस के बाहर ही लोगों को जूते-खोलने होंगे। महाराष्ट्र सरकार का साफ कहना है कि गाइडलाइंस का जो भी उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इधर, सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट ने एक एप डेवलप किया है, इसमें क्यूआर कोड के जरिए लोग समय बुक कर सकते हैं और भगवान का दर्शन कर सकते हैं।