फ्लेक्सी फेयर सिस्टम का मतलब जैसे-जैसे सीटें भरती जाएंगी किराया भी वैसे-वैसे बढ़ता जाएगा। सेकंड क्लास, स्लीपर, सेकंड एसी और चेयर कार जैसी श्रेणियों में 10 फीसदी सीटें बढ़ने के बाद बेस फेयर 10 फीसदी बढ़ता है।
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में शुरू की गई फ्लेक्सी फेयर स्कीम को लेकर एक समीक्षा रिपोर्ट सामने आई है। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में इस फैसले के लिए फटकार लगाई है। दरअसल बताया जा रहा है कि इस फैसले से रेलवे की कमाई में तो इजाफा हुआ है, लेकिन यात्रियों की संख्या तेजी से कम हो गई है।
...इसलिए लगाई फटकार
- राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी ट्रेनों में इस व्यवस्था के चलते यात्रियों की संख्या तेजी से घटी है।
- फ्लेक्सी फेयर लगने से 9 सितंबर 2016 से 31 जुलाई 2017 तक प्रीमियम ट्रेनों से करीब सात लाख यात्री दूर हो गए।
- सेकंड एसी की 17 फीसदी और थर्ड एसी की पांच फीसदी सीटें खाली रह रही हैं।
- शताब्दी ट्रेनों की 25 फीसदी सीटें खाली रही हैं।
- इसका असर रूट पर चलने वाली मेल, एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों पर पड़ा। उनमें क्षमता से अधिक लोड बढ़ गया।
- ज्यादा किराए के चलते यात्रियों को मजबूरन ट्रेन की बजाए हवाई यात्रा की तरफ बढ़ना पड़ रहा है।
- कैग के मुताबिक, 'थर्ड एसी पहले से फायदे में था, इसमें फ्लेक्सी फेयर अनुचित था।'
...इसलिए ट्रेन से बेहतर हो गई फ्लाइट
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 दिशाओं की हवाई यात्रा के लिए 120 दिन पहले टिकट बुकिंग कराने पर बेहद सस्ते में यात्रा हो जाती है। शेष नौ दिशाओं में भी औसतन 600 रुपए का ही अंतर है।
क्या है फ्लेक्सी फेयर स्कीम?
इस व्यवस्था का मतलब जैसे-जैसे सीटें भरती जाएंगी किराया भी वैसे-वैसे बढ़ता जाएगा। सेकंड क्लास, स्लीपर, सेकंड एसी और चेयर कार जैसी श्रेणियों में 10 फीसदी सीटें बढ़ने के बाद बेस फेयर 10 फीसदी बढ़ता है, जबकि थर्ड एसी में शुरुआती 40 फीसदी सीटें भरने के बाद बेसिक किराए में 10 फीसदी का इजाफा होता है।