
PCCF Chhattisgarh, पीसीसीएफ प्रेस कांफे्रंस (Photo- Patrika)
अंबिकापुर. छत्तीसगढ़ में बढ़ते हाथी-मानव संघर्ष को कम करने के लिए अब देशभर में अपनाई जा रही प्रभावी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) अरुण कुमार पांडेय (PCCF) ने सरगुजा प्रवास के दौरान अधिकारियों की बैठक लेने के बाद पत्रकारों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वन्य जीवों से होने वाली जनहानि रोकना वन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर निगरानी और प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया जाएगा।
पीसीसीएफ ने बताया कि वर्तमान में हाथियों की निगरानी के लिए मोबाइल ऐप और हाथी मित्र दल सक्रिय हैं। ऐप के माध्यम से हाथियों की मौजूदगी की पूर्व सूचना ग्रामीणों तक पहुंचाई जाती है। उन्होंने कहा कि केरल में हाथियों की संख्या छत्तीसगढ़ से अधिक होने के बावजूद वहां मौत (Death case) के मामले अपेक्षाकृत कम हैं।
वहां की अच्छी व्यवस्थाओं और तकनीकों का अध्ययन कर उन्हें छत्तीसगढ़ में लागू किया जाएगा। पीसीसीएफ (PCCF Arun Kumar Pandey) ने स्वीकार किया कि हाथियों की मौत भी चिंता का विषय है। फसल और संपत्ति के नुकसान का मुआवजा दिया जाता है, लेकिन मानव और वन्य जीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती है।
पीसीसीएफ ने कहा कि वनभूमि पर अतिक्रमण गंभीर समस्या है और इसे रोकने के लिए अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। एसईसीएल के साथ संयुक्त अभियान चलाकर कोयला चोरी (Coal theft) और अतिक्रमण पर भी कार्रवाई की जाएगी।
हसदेव क्षेत्र में कोयला खदानों के विस्तार और पेड़ों की कटाई (Trees cut) पर उन्होंने कहा कि पर्यावरण और जैव विविधता पर इसके प्रभाव का आकलन दीर्घकालिक अध्ययन के बाद ही संभव है। फिलहाल इस विषय पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
पीसीसीएफ ने बताया कि लेमरू एलीफेंट रिजर्व (Lemaru Elephant Reserve) का क्षेत्रफल बढ़ाकर 1 हजार 995 वर्ग किलोमीटर कर दिया गया है और इसका नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। परियोजना के लिए राशि भी स्वीकृत है तथा कार्य जल्द गति पकड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि संरक्षित क्षेत्रों में बसे गांवों के पुनर्वास के लिए ग्रामीणों की सहमति से नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
Updated on:
20 Jul 2026 08:23 pm
Published on:
20 Jul 2026 08:23 pm
