
नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ ( Protest Against Agriculture Laws ) गाजीपुर बॉर्डर ( Ghazipur Border ) पर किसानों का धरना प्रदर्शन जारी है। इस बीच भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत ( BKU Leader Rakesh Tikait ) ने कहा कि हम केंद्र सरकार तभी बातचीत करेंगे, जब वो हमारे लोगों को छोड़ेंगे। राकेश टिकैत ( Rakesh Tikait ) ने कहा कि सरकार के साथ दबाव में कोई समझोता नहीं किया जाएगा। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( PM Narendra Modi ) की ओर की गई बातचीत की पेशकश पर टिकैत ने उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हमारे भी हैं। हम उनके प्रस्ताव का सम्मान करते हैं, लेकिन हम पहले अपने लोगों को छुड़वाना चाहते हैं। आपको बता दें शनिवार को बजट सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक ( All party meeting ) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान आंदोलन ( Farmer Protest ) को लेकर कहा था कि सरकार अपने डेढ़ साल वाले प्रस्ताव पर अभी भी बरकरार है, बस किसानों फैसला करना है। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार किसानों से जुड़े हर मुद्दे पर वार्ता करने को तैयार है। कृषि मंत्री किसानों से केवल एक कॉल दूर है। किसान जब चाहें उनको फोन कर बुला सकते हैं।
किसान आंदोलन का रविवार को 67वां दिन
आपको बता दें कि किसान आंदोलन का रविवार को 67वां दिन है। आंदोलनरत किसानों की मांगों को लेकर सरकार और प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे यूनियनों के बीच एक बार फिर बातचीत शुरू होने का इंतजार हो रहा है। तीन कृषि कानूनों को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए सरकार और आंदोलनरत किसान दोनों तैयार हैं। हालांकि, अगली बातचीत का एजेंडा क्या होगा, इस पर तस्वीर साफ नहीं है, क्योंकि सरकार ने नये कृषि कानूनों के अमल पर डेढ़ साल तक रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसे किसान यूनियनों ने पहले ही खारिज कर दिया है और अब तक कोई नया प्रस्ताव नहीं आया है। सरकार ने बातचीत को आगे बढ़ाने की बात जरूर कही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आश्वासन दिया कि
संसद में एक फरवरी को आम बजट पेश होने से पहले शनिवार को सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आश्वासन दिया कि सरकार खुले दिमाग से कृषि कानूनों के मुद्दे पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का रुख वैसा ही है, जैसा 22 जनवरी को था, और कृषि मंत्री द्वारा दिया गया प्रस्ताव अभी भी कायम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि मंत्री को सिर्फ एक फोन कॉल कर बातचीत को आगे बढ़ाया जा सकता है।