दुनिया में अपना रुतबा स्थापित करने के लिहाज से वर्ष 2018 हिंदुस्तान के लिए अच्छा साबित हुआ। इस साल हिंदुस्तान ने एक ऐसा काम किया, जिससे यह दुनिया में सबसे ऊंचा बन गया।
नई दिल्ली। दुनिया में अपना रुतबा स्थापित करने के लिहाज से वर्ष 2018 हिंदुस्तान के लिए अच्छा साबित हुआ। इस साल हिंदुस्तान ने एक ऐसा काम किया, जिससे यह दुनिया में सबसे ऊंचा बन गया। गुजरात में अक्टूबर में बनकर तैयार हुई स्टेच्यू ऑफ यूनिटी ने पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया। इस साल सरदार वल्लभ भाई पटेल की इस प्रतिमा ने दुनिया की अन्य प्रतिमाओं को बौना साबित कर दिया।
स्टेच्यू ऑफ यूनिटी की स्थापना सरदार वल्लभ भाई पटेल की याद में की गई है। 31 अक्टूबर को लौह पुरुष के नाम से मशहूर पटेल की जयंती के अवसर पर पीएम नरेंद्र मोदी देश ने यह गगनचुम्बी प्रतिमा राष्ट्र को समर्पित की।
182 मीटर ऊंची इस प्रतिमा के निर्माण में हजारों मजदूर व सैकड़ों इंजीनियर महीनों तक जुटे रहे। साथ ही अमरीका, चीन से लेकर भारत के शिल्पकारों ने इसे तैयार करने में भारी मेहनत की। इस प्रतिमा के सामने आने के बाद इसकी एक और खूबी यह नजर आई कि यह अंतरिक्ष से भी दिखाई देती है।
लौह पुरुष की यह प्रतिमा 44 माह में बनकर तैयार हुई। गुजरात में सरदार सरोवर नर्मदा बांध हाईवे व हजारों किमी नर्मदा नहर बनाने वाले राठौड़ की देखरेख में स्टेच्यू ऑफ यूनिटी बनकर तैयार हुई है।
प्रतिमा के शिल्पकार राम सुतार का कहना है कि प्रतिमा को सिंधु घाटी सभ्यता की कला से बनाया गया है। इसमें चार धातुओं का उपयोग किया गया है जिसमें सदियों तक जंग नहीं लगेगी। स्टेच्यू में 85 फीसदी तांबे का इस्तेमाल किया गया है।
सरदार का चेहरा कैसा हो इस बात को तय करने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट की एक कमेटी बनी जिसमें दस लोग शामिल थे। एल एंड टी कंपनी ने उनके चेहरे, कपड़े और चादर का 3डी चेहरा बनाया। उसके बाद 30 फीट का चेहरा बनाया। इसे दिल्ली आकर दिखाया गया तो मंजूरी मिलने के बाद इस पर काम शुरू हुआ।
रिपोर्ट्स के मुताबिक पीएम मोदी ने इस प्रतिमा का निर्माण शुरू कराने से पहले दुनिया भर की ऊंची प्रतिमाओं को लेकर शोध कराया। शोध के दौरान जब दुनिया में सबसे ऊंची प्रतिमाओं का इतिहास खंगाला तो चीन में बुद्ध की प्रतिमा सबसे ऊंची 128 मीटर की निकली। उसके बाद अमरीका की स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी 93 मीटर है।
इसके बाद पीएम मोदी ने नर्मदा नदी के पट में 182 मीटर लंबी प्रतिमा को खड़ा करने का निर्णय लिया। अमरीकन आर्किटेक्ट माइकल ग्रेस और टनल एसोसिएट्स कंपनी को साथ लेकर इस पर शोध कराया। भारत में लगी सरदार की विविध प्रतिमाओं का महीनों अवलोकन कर सरदार के नैन नक्श और चेहरे की आकृति को रूप दिया गया।
मोदी चाहते थे कि सरदार लोगों के दिलों में जिस तरह बसे हैं प्रतिमा का स्वरूप भी वैसा ही होना चाहिए। इस काम का जिम्मा सौंपा सरदार सरोवर नर्मदा निगम के अध्यक्ष और गुजरात के हाईवे व कैनालमैन एसएस राठौड़ को। इसे बनाने का काम शिल्पकार पद्मश्री राम सुतार और उनके पुत्र अनिल सुतार ने किया है। दोनों कलाकारों को इस काम में सहयोग चीन, अमरीका के इंजीनियरों और भारत के कलाकारों ने पूरा किया है।
स्टेच्यू ऑफ यूनिटी की खूबियां
दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमाएंं
प्रतिमा में लगा क्या है?
मजबूती