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लाइसेंसिंग की बेड़ियों में जकड़ा है हॉस्पिटिलिटी उद्योग, निवेश बढ़ाना है तो कम करो लाइसेंस का बोझ: नीति आयोग की सिफारिश

नीति आयोग के अनुसार एक कारोबारी को होटल शुरू करने के लिए करीब 50 तरह की अनुमतियां लेनी पड़ती हैं। आयोग की रिपोर्ट “अनलॉकिंग ग्रोथ इन टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी सेक्टर” के अनुसार इस लाइसेंसिंग के मायाजाल के चलते ही भारत प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन संसाधनों के बाद कई छोटे छोटे देशों से बहुत पीछे है। आयोग ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस क्षेत्र में नियामकीय सुधारों को बहुत तेजी से लागू करने की सिफारिश की है।
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Hospitality industry

अभिषेक सिंघल

नई दिल्ली। टूरिज्म के एक बड़े सेक्टर हॉस्पिटेलिटी उद्योग में देश में नियमों का जाल ऐसा उलझा है कि एक समान आकार के भूखंड पर होटल बनाने से जयपुर में तो सालाना 38 करोड़ की कमाई हो सकती है वहीं लखनऊ में उसी आकार का भूखंड 126 करोड़ सालाना तक कमा कर दे सकता है। सिंगापुर में तो यह आमदनी 200 करोड़ तक हो सकती है। देश जहां पर्यटन बड़े उद्योग और रोजगार प्रदाता के रूप में उभर रहा है वहीं लाइसेंसिंग की बेड़ियं निवेशकों के लिए कड़ी चुनौती बना है। नीति आयोग के अनुसार एक कारोबारी को होटल शुरू करने के लिए करीब 50 तरह की अनुमतियां लेनी पड़ती हैं। आयोग की रिपोर्ट “अनलॉकिंग ग्रोथ इन टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी सेक्टर” के अनुसार इस लाइसेंसिंग के मायाजाल के चलते ही भारत प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन संसाधनों के बाद कई छोटे छोटे देशों से बहुत पीछे है। आयोग ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस क्षेत्र में नियामकीय सुधारों को बहुत तेजी से लागू करने की सिफारिश की है।

विश्व अर्थव्यवस्था में 10 तो भारत में केवल 5 प्रतिशत योगदान

विश्व भर में पर्यटन बढ़ता कारोबार है और 2024 में वैश्विक जीडीपी में पर्यटन की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत थी। जबकि वर्ष 2023-24 में भारत की जीडीपी में पर्यटन का योगदान 5.22 प्रतिशत करीब 15.73 लाख करोड़ रुपये रहा है। हालांकि पिछले पांच साल में इसमें 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही है। पर वैश्विक अनुपात की तुलना में भारत अभी आधा ही पहुंचा है। देश में लगभग 8.46 करोड़ रोजगार पर्यटन से जुड़े हैं। 2024 में घरेलू पर्यटक 2.9 अरब रहे। भारत वैश्विक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक अराइवल में महज 1.5 प्रतिशत से कम हिस्सेदारी रखता है। वर्ष 2024 में भारत में 99.5 लाख विदेशी पर्यटक आए जो टर्की, थाईलैंड, मलेशिया और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में काफी कम है।

भारत में लगता है तीन गुना ज्यादा समय

भारत में एक होटल परियोजना को मंजूरी से संचालन तक पहुंचने में सामान्यतः 36 से 48 महीने लग जाते हैं, जबकि आसियान देशों में यही प्रक्रिया 12 से 18 महीनों में पूरी हो जाती है। होटल उद्योग सबसे अधिक नियमों में जकड़ा है और एक होटल को विभिन्न स्तरों पर लगभग 50 से 60 अनुमतियां एवं लाइसेंस लेने पड़ते हैं। रिपोर्ट के अनुसार एकोमोडेशन के स्तर पर 50 और फूड व बेवरेज के लिए 30 के करीब अनुमतियां लेनी होती हैं।

एफएआर बढ़ाएं

नीति आयोग ने निवेश बढ़ाने के लिए रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुधार सुझाए हैं। इनमें होटल निर्माण के लिए फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाना, ग्राउंड कवरेज संबंधी प्रतिबंधों में ढील देना, पार्किंग मानकों को तर्कसंगत बनाना, छोटे होटलों के लिए न्यूनतम भूखंड आकार की शर्त समाप्त करना तथा ऊंची इमारतों के लिए अतिरिक्त अनुपालन की सीमा बढ़ाना शामिल है। आयोग का मानना है कि इससे पर्यटन परियोजनाओं की लागत घटेगी और भारत को वर्ष 2047 तक 10 करोड़ विदेशी पर्यटकों तथा 3 ट्रिलियन डॉलर की पर्यटन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।

अन्तरराष्ट्रीय पर्यटक अराइवल (2024) मिलियन में

टर्की60.6
थाईलैंड35.5
सउदी अरब29.7
मलेशिया 25
वियतनाम 17.5
इजिप्ट 15.8
इंडोनेशिया13.6
भारत 9.9

5000 वर्गमीटर के प्लॉट पर कहां कितनी अनुमति और आय

शहर फ्लोर एरिया फ्लोर रूम वार्षिक आय अऩुमानित (करोड़ में)
नोर्थ ब्यूआना सिंगापुर 52735 14 1265 200
कोची (केरल) 19500 6 468 74
मुंबई सेंट्रल (महाराष्ट्र) 24588 7 59093
शिलांग (मेघालय) 9000 3 216 34
जयपुर (राजस्थान) 10000 5 240 38
लखनऊ(उत्तर प्रदेश) 33218 14 797 126

आयोग ने की ये सिफारिशें

-आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश की तर्ज पर सेटबैक, पार्किंग और ओपन स्पेस की जरूरतें पूरी होने पर ग्राउंड कवरेज की शर्त हटाएं भौगोलिक, सिस्मिक, पर्यावरणीय जरूरतों को ध्यान में रखने बाद संभव हो तो

-18 मीटर तक चौड़ी सड़क पर एफएआर को 1 -4 , 18 मीटर से ज्यादा पर 5-7 तक बढ़ाया जाए, वहीं महाराष्ट्र, ओडिशा और तमिलनाडू की तर्ज पर होटल के लिए 9 मीटर चौड़ी सड़क की बाध्यता हटाई जाए

- हरियाणा, ओडिशा एवं तमिलनाडू की तर्ज पर कम ऊंचाई वाली होटल्स के लिए न्यूनतम प्लॉट एरिया की बंदिश हटाई जाए भौगोलिक, सिस्मिक, पर्यावरणीय जरूरतों को ध्यान में रखने बाद ऊंचाई की सीमा को 23 मीटर तक बढ़ाया जाए।

जयपुर में होटल निवेशक को विभिन्न स्तरों पर आवश्यक अनुमतियां

प्रोजेक्ट डवलपमेंट - 11

कंस्ट्रक्शन - 12

लाइसेंसिंग -11

आपरेशनल कंप्लाइंस- 7

(विभागों के सतत निरीक्षण के दायरे में रिपोर्ट में बताए अनुसार)

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