
(आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का मामला। फोटो सोर्स-ANI
Ankit Sharma murder case: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में साल 2020 के दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का मामला पुलिस के लिए शुरुआत से ही बड़ी चुनौती बना हुआ था। घटनास्थल से मिले सीमित सबूतों और खराब हालात के बीच जांच टीम ने धुंधले मोबाइल वीडियो, चश्मदीदों की गवाही और दूसरे साक्ष्यों को जोड़कर मामले की कड़ियां जोड़ीं। अब इस मामले में अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों को दोषी ठहराया है।
अंकित शर्मा की हत्या के बाद जब पुलिस ने जांच शुरू की तो सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि मौके पर साफ और मजबूत वीडियो सबूत उपलब्ध नहीं थे। पुलिस के पास एक मोबाइल वीडियो आया था, जिसमें चांद बाग इलाके में नाले के पास एक व्यक्ति को ले जाते हुए और उसके साथ मारपीट जैसी स्थिति दिखाई दे रही थी। हालांकि वीडियो धुंधला था और उसमें मौजूद लोगों की पहचान करना आसान नहीं था।
जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि घटनास्थल के आसपास लगे कई सीसीटीवी कैमरे दंगों के दौरान खराब हो चुके थे। कुछ कैमरे क्षतिग्रस्त कर दिए गए थे, जबकि उपलब्ध फुटेज में भी कई लोगों के चेहरे साफ नजर नहीं आ रहे थे। कई संदिग्धों ने अपना चेहरा ढक रखा था, जिससे उनकी पहचान करना जांच अधिकारियों के लिए और मुश्किल हो गया।
ऐसे में पुलिस ने अपनी जांच का आधार सिर्फ वीडियो फुटेज को नहीं बनाया, बल्कि इलाके में मौजूद लोगों से मिली जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों पर भी ध्यान दिया। जांच टीम ने एक-एक गवाह से पूछताछ की और घटनाक्रम को जोड़ने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, गवाहों के बयान और अन्य सबूतों ने मामले को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
हत्या का मामला 26 फरवरी 2020 को दर्ज किया गया था, जिसके बाद इसकी जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। लंबे समय तक चली जांच और अदालत में हुई सुनवाई के बाद अब इस मामले में फैसला आया है।
अंकित शर्मा हत्याकांड की जांच में पुलिस के सामने कई चुनौतियां थीं। सीमित तकनीकी सबूतों के बावजूद गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर केस तैयार किया गया। अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों की चर्चा तेज हो गई है। इस पूरे मामले ने यह भी दिखाया कि किसी बड़े अपराध की जांच में हर छोटा सुराग कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। एक धुंधले वीडियो से शुरू हुई पड़ताल आखिरकार गवाहियों और जांच की कई कड़ियों से गुजरते हुए अदालत के फैसले तक पहुंची।
Updated on:
14 Jul 2026 11:01 am
Published on:
14 Jul 2026 11:01 am
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