विविध भारत

सरकार ने रिलायंस से मांगा 10 हजार करोड़ का मुआवजा

अडानी ग्रुप्स की तरफ से स्थापित एनजीओ अडानी फाउंडेशन का लाइसेंस भी रद्द कर दिया है

2 min read
Nov 05, 2016
mukesh ambani

नई दिल्ली। सरकार ने केजी बेसिन से सार्वजनिक कंपनी ओएनजीसी की परियोजना से गैस निकालने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसके भागीदारों से 1.55 अरब डॉलर (लगभग 10 हजार करोड़) का मुआवजा मांगा है। रिलायंस व उसके भागीदारों ने यह यह गैस बीते सात साल के दौरान निकाली। सूत्रों के अनुसार पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को नोटिस भेजकर 1.55 अरब डॉलर का मुआवजा मांगा है।

न्यायाधीश एपी शाह समिति ने कहा था कि रिलायंस ने आंध्र प्रदेश तट के समीप बंगाल की खाड़ी में कृष्णा गोदावरी (केजी) बेसिन के अपने ब्लॉक से सटे ओएनजीसी ब्लाक की प्राकृतिक गैस पिछले 7 साल तक निकाली रही और उसे सरकार को भुगतान करना चाहिए।

आईआरएल ने किया बचाव

सरकार की तरफ से गुरुवार को आरआईएल और उसके भागीदारों को मुआवजा संबंधी नोट भेजा गया था। अब रिलायंस ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। कंपनी की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि वह इस मामले में मध्‍यस्‍थता के जरिए सुनवाई की शुरुआत करने पर विचार कर रही है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि मुआवजे की जो मांग की गई है वह प्रॉडक्‍शन शेयरिंग कॉन्‍ट्रैक्‍ट के अहम हिस्‍सों की 'गलत तरीके से व्‍याख्‍या और गलत अर्थ निकालने' की वजह से है और दुनिया में कहीं भी गैस और तेल इंडस्‍ट्री में इस तरह की मिसाल नहीं है। बयान में कहा गया, 'आरआईएल क्कस्ष्ट में विवाद निपटारा प्रणाली को शुरू करने का प्रस्‍ताव देती है और सरकार को मध्‍यस्‍थता संबंधी नोटिस (नोटिस ऑफ आर्बिट्रेशन) जारी करती है। आरआईएल अपनी उस पोजिशन को पूरी तरह तर्कसंगत ठहराने को तैयार है कि सरकार का दावा टिकाऊ नहीं है।'

अडानी फाउंडेशन का रजिस्‍ट्रेशन रद्द

वहीं गौतम अडानी की अगुवाई वाले अडानी ग्रुप्स की तरफ से स्थापित एनजीओ अडानी फाउंडेशन का लाइसेंस भी सरकार ने रद्द कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फॉरेन कॉन्ट्रिब्‍यूशन रेग्‍युलेशन ऐक्‍ट के तहत 25 एनजीओ का रजिस्‍ट्रेशन रिन्‍यू करने से इनकार कर दिया है। ऐसा इसलिए किया गया है क्‍योंकि ये एनजीओ कथित तौर पर उन गतिविधियों में शामिल हैं जो राष्‍ट्रहित के अनुकूल नहीं हैं। यह कार्रवाई तब सामने आई है जब इससे पहले 11,319 एनजीओ का स्नष्टक्र्र लाइसेंस कैंसल कर दिया गया था। यह कार्रवाई इसलिए की गई थी क्‍योंकि इन्‍होंने तय वक्‍त के भीतर लाइसेंस रिन्‍यू के लिए अप्‍लाई नहीं किया था।

जिन 11,319 एनजीओ का स्नष्टक्र्र लाइसेंस रद्द मान लिया गया है उनमें कई बड़े नाम शामिल हैं। मसलन, अडानी फाउंडेशन, इंदिरा गांधी नैशनल सेंटर फॉर आर्ट्स, ऑक्‍सफैम इंडिया ट्रस्‍ट, संजय गांधी मेमोरियल ट्रस्‍ट आदि प्रमुख हैं। सरकार ने 2 नवंबर को जारी एक आदेश में कहा था कि इन सभी एनजीओ का रजिस्‍ट्रेशन 1 नवंबर से रद्द मान लिया जाएगा। हालांकि, अभी जिन 25 एनजीओ का रजिस्‍ट्रेशन रिन्‍यू करने से इनकार किया गया है, उनकी पहचान को लेकर गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने चुप्‍पी साध रखी है।

Published on:
05 Nov 2016 10:13 am
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