गुजरात में पत्रकारों के लिए एक नया फरमान जारी हुआ है।
नई दिल्ली। फर्जी खबरों को लेकर सरकार द्वारा उठाया कदम फलीभूत नहीं हो पाया। फेक न्यूज पर सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी किए गए दिशा निर्देशों पर हंगामे के बाद गुजरात में पत्रकारों के लिए एक नया फरमान जारी हुआ है।
सूरत के पुलिस कमिश्नर ने जारी किया विवादित बयान
गुजरात के सूरत में मीडिया पर नकेल कसने की तैयारी हो गई है। बता दें कि सूरत के पुलिस कमिश्नर ने ये विवादित फरमान जारी किया है।
सूरत के पुलिस कमिश्नर सतीश शर्मा ने फरमान जारी करते हुए कहा कि अब से पुलिस थानों या घटनास्थलों की रिपोर्टिंग करने से पहले मीडिया को पुलिस इंस्पेक्टर या थाना इंचार्ज इजाजत लेनी पड़ेगी। कमिश्नर ने इस फरमान पर बात करते हुए कहा कि इससे मीडिया कर्मियों पर नियंत्रण रखा जाएगा।
सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय का दिशा निर्देश
बता दें कि फर्जी खबरों पर शिकंजा कसने के लिए सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार को एक दिशा निर्देश जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि अगर कोई मान्यता प्राप्त पत्रकार फर्जी खबर लिखने या उसे प्रचारित करने का दोषी पाया जाता है तो उसकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी। हांलाकि पत्रकारों ने इसका जमकर विरोध किया जिसको बाद पीएम मोदी के निर्देश पर सरकार ने यह निर्देश वापस लिया था।
मामले पर पीएम मोदी का बयान
पीएम मोदी ने कहा , ये मामला भारतीय प्रेस परिषद को देखना चाहिए और इस मामले पर दिशा- निर्देश भी वही देगा। गौरतलब है कि सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार को जारी बयान में कहा था कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में फर्जी खबरों के बढ़ते मामलों को देखते हुए मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए दिशा निर्देशों जारी किया गया है।
पीएम कार्यालय ने मंगलवार सुबह मंत्रालय को विज्ञप्ति वापस लेने का निर्देश देते हुए कहा था कि फेक न्यूज से निपटने की जिम्मेदारी पीसीआई और एनबीए जैसी संस्थाओं की होनी चाहिए।