
नई दिल्ली। हैदराबाद मक्का मस्जिद बम विस्फोट पर एनआईए कोर्ट का फैसला आने के बाद गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी ने मीडिया से बातचीत के दौरान बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अदालत से इस तरह के फैसले की ही उम्मीद थी। ऐसा इसलिए कि मक्का मस्जिद बम विस्फोट में हिंदू आतंकवाद की कोई भूमिका नहीं थी। इसे सुनियोजित षडयंत्र के तहत एक मुद्दा बनाया गया था। हिंदू आतंकवाद का मुद्दा पूरी तरह से इंजीनियर्ड था। हालांकि उन्होंने इस बात का जिक्र नहीं किया कि हिंदू आतंकवाद की अवधारणा के पीछे किसकी भूमिका थी। आपको बता दूं कि 2007 में बम विस्फोट के समय आरवीएस मणि गृह मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत थे।
सीबीआई ने 10 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था
इस मामले में सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में दस लोगों को आरोपी बनाया था। 2011 में सीबीआई से यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी ( एनआईए ) के पास चला गया। इस धमाके में स्वामी असीमानंद समेत कुल 10 लोगों पर आरोप लगा था, एक आरोपी की मौत हो चुकी है और दो आज भी फरार चल रहे हैं। सीबीआई के आरोप पत्र में स्वामी असीमानंद, देवेंदर गुप्ता, लोकेश शर्मा, लक्ष्मण दास महाराज, मोहनलाल रातेश्वर, राजेंदर चौधरी, भारत मोहनलाल रातेश्वर, रामचंद्र कलसांगरा, संदीप डांगे और सुनील जोशी का नाम शामिल था।
कोर्ट के सामने मुकर गए 64 गवाह
इस मामले में अब तक कुल 226 चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए और कोर्ट के सामने 411 दस्तावेज पेश किए गए। लेकिन NIA को इस केस की जांच में काफी मुश्कलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि 64 गवाह कोर्ट के सामने मुकर गए, जिनमें लेफ्टिनेंट कर्लन श्रीकांत पुरोहित और झारखंड के मंत्री रणधीर कुमार सिंह भी शामिल हैं।
एनआईए कोर्ट ने पांचों आरोपियों को किया बरी
इससे पहले एनआईए कोर्ट ने हैदराबाद मक्का मस्जिद बम विस्फोट मामले में सोमवार को अपने फैसले में असीमानंद समेत सभी पांच आरोपियों को बरी कर दिया। प्रसिद्ध मक्का मस्जिद उड़ाने के लिए 11 साल पहले बम विस्फोट से उड़ाने का प्रयास किया गया था। इस शक्तिशाली बम धमाके में 9 लोगों की मौत हुई थी और 58 लोग घायल हुए थे। इस मामले में 10 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से आठ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुआ था। आरोपियों में स्वामी असीमानंद का नाम भी शामिल है। पिछले कुछ समय से स्वामी असीमानंद और भारत मोहनलाल रत्नेश्वर उर्फ भरत भाई जमानत पर थे।