प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया।
नई दिल्ली। भारत की आजादी का जश्न पूरे देश में मनाया जा रहा है। देश का हर शख्य जश्न-ए-आजादी में डूबा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश की राजधानी दिल्ली के लाल किले से राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। साथ ही तिरंगा भी फहराया। लाल किले की प्राचीर से फहराए जाने वाला राष्ट्र की शान तिरंगा हर मायने में खास होता है।
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कर्नाटक से बनकर आता है तिरंगा
कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ (केकेजीएसएसएफ) देश का एक मात्र ऐसा संगठन है, जिसे तिरंगा बनाने की आधिकारिक तौर पर अनुमति मिली हुई है। लाल किले पर फहराए जाने वाला यह परचम कर्नाटक से तैयार होकर आता है। इस तिरंगे के लिए खादी का कपड़ा बालाकोट जिले में रहने वाले मजदूर ही बनाते हैं।
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केंद्र सरकार की तरफ से संघ को करीब दो महा पहले ही ऑर्डर दिया जाता है। इस तिरंगे के लिए खादी बालाकोट के तुलसीगेरी गांव में तैयार की जाती है। लाल किले पर फहराए जाने वाले इस तिरंगे का निर्माण करीब 6 चरणों में पूरा किया जाता है। ऑर्डर मिलने के बाद सबसे पहले तिरंगे के कपड़े के लिए पहले हाथों से कताई की जाती है, फिर बुनाई का काम होता है। खादी की तैयारी के बाद इसे हुबली केंद्र भेजा जाता है, यहां पर तिरंगे की सिलाई का काम होता है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज बनाए जाते हैं। गौरतलब है कि केंद्र और राज्यों की सरकार के अलावा इस जगह से निजी संस्थाएं भी ऑर्डर देकर राष्ट्र ध्वज बनवाती और मंगवाती हैं। इस बात की जानकारी बेहद ही कम लोगों को होती है कि लाल किले पर फहराए जाने वाला तिरंगा 12x8 फीट का होता है, जिसकी कीमत करीब 6500 रुपए होती है।