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भारत के मंदिरः अभी भी कहीं पर पुरुषों तो कहीं पर महिलाओं के प्रवेश पर है पाबंदी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एक ओर महिलाओं को सदियों पुराने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश का अधिकार मिल गया, लेकिन देश में अभी भी ऐसे तमाम मंदिर हैं जहां पर कुछ में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है तो कुछ में पुरुष अंदर नहीं जा सकते।

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भारत के वो मंदिर जहां अभी भी पुरुषों या महिलाओं के प्रवेश पर है पाबंदी

नई दिल्ली। अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल के सबरीमाला मंदिर में हर आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत दे दी। अदालत की पांच सदस्यीय पीठ ने 4-1 के बहुमत से अपने फैसले में कहा कि 10 से लेकर 50 वर्ष आयु तक की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से रोकना गैरकानूनी और असंवैधानिक है। हालांकि इस फैसले से जहां एक ओर महिलाओं को सदियों पुराने इस मंदिर में प्रवेश का अधिकार मिल गया, देश में अभी भी ऐसे तमाम मंदिर हैं जहां पर कुछ में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है तो कुछ में पुरुष अंदर नहीं जा सकते।

इन मंदिरों में अभी भी है महिलाओं का प्रवेश वर्जित

कामाख्या देवी मंदिरः असम के बरपेटा में मौजूद मशहूर कामाख्या देवी मंदिर महिलाओं के प्रवेश को लेकर थोड़ा अलग नियम अपनाए हुए है। यहां पर केवल एक निर्धारित वक्त के लिए महिलाओं के अंदर जाने पर रोक लगी हुई है।

मंगल चांडी मंदिरः झारखंड में बोकारो स्थित मंगल चांडी मंदिर में महिलाओं को इसलिए अंदर जाकर पूजा नहीं करने दी जाती क्योंकि मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि इससे कोई अनहोनी घट सकती है।

मावली माता मंदिरः छत्तीसगढ़ स्थित धमतरी से करीब पांच किलोमीटर दूरी पर है पुरूर गांव। यहां मौजूद आदि शक्ति माता मावली का मंदिर है, जहां पर महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगी हुई है।

पद्मनाभस्वामी मंदिरः केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित प्रसिद्ध पद्मनाभस्वामी मंदिर में अभी भी महिलाओं के अंदर जाने पर पाबंदी है। मंदिर के अंदर मौजूद खजाने को लेकर भी यह काफी सुर्खियों में रहा था।

कार्तिकेय मंदिरः हरियाणा के पिहोवा में कार्तिकेय मंदिर बना हुआ है। यहां पर आज भी महिलाओं के अंदर जाने पर रोक लगी हुई है।

घटई देवी मंदिरः महाराष्ट्र के सतारा में मौजूद घटई देवी मंदिर के भीतर कोई भी महिला प्रवेश नहीं कर सकती।

सोलह शिवलिंग शनिश्वरः यह मंदिर भी महाराष्ट्र के सतारा में मौजूद है। सोलह शिवलिंग शनिश्वर नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।

विमला खंड शक्तिपीठः उड़ीसा के जगन्नाथपुरी स्थित अंजली लखेड़ापुरी में जगन्नाथ मंदिर के परिसर में मौजूद है प्राचीन विमला देवी शक्तिपीठ। यहां पर भी महिलाओं को जाने रोका जाता है।

रणकपुर जैन मंदिरः राजस्थान के रणकपुर में मौजूद जैन मंदिर, इस धर्म के पांच प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। यहां भी महिलाओं के अंदर जाने पर पाबंदी है।

कार्तिकेय मंदिरः राजस्थान के पुष्कर में मौजूद कार्तिकेय मंदिर काफी मशहूर है। इसके अंदर भी महिलाओं के प्रवेश पर रोक है।

पुरुषों के प्रवेश पर पाबंदी वाले मंदिर

अट्टुकल मंदिरः केरल स्थित अट्टुकल मंदिर में नियम है कि यहां केवल महिलाएं ही पूजा कर सकती हैं। यहां पर पुरुषों का प्रवेश वर्जित है।

भगवती मां मंदिरः कन्याकुमारी स्थित भगवती मां मंदिर में माता के कन्या रूप की पूजा होती है। यहां पर मंदिर परिसर में भी पुरुषों को प्रवेश की इजाजत नहीं है। केवल संन्यासी पुरुष ही मंदिर के दरवाजे तक जा सकते हैं।

त्रयंबकेश्वर मंदिरः महाराष्ट्र के नासिक में बने भगवान शिव के इस ज्योतिर्लिंग में एक सीमा के आगे महिलाओं को प्रवेश की इजाजत नहीं थी, लेकिन पुरुषों को थी। हालांकि बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट में जब मामला पहुंचा तो पुरुषों को भी आंतरिक परकोटे में प्रवेश करने से रोक दिया गया।

ब्रह्मा मंदिरः राजस्थान के पुष्कर में बने दुनिया का इल इकलौते ब्रह्मा के मंदिर में विवाहित पुरुषों को प्रवेश की अनुमति नहीं है। हालांकि यहां कुंवारे पुरुष अंदर जा सकते हैं।

माता मंदिरः बिहार के मुजफ्फरपुर में मौजूद माता मंदिर के भीतर आने से एक निर्धारित समय तक पुरुषों को प्रवेश से वर्जित रखा जाता है। इस दौरान मंदिर के पंडित भी अंदर नहीं आ सकते।

कामरूप कामाख्या मंदिरः असम में बने इस मंदिर में केवल मासिक धर्म चक्र के दौरान ही परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जाती है। इस मंदिर में केवल महिला पुजारी या संन्यासी ही मंदिर में सेवा करते हैं।

छक्कूलाथुकावु मंदिरः केरल में बने इस मंदिर में महिलाओं की पूजा होती है। नारी पूजा के दौरान मंदिर के भीतर पुरुषों का प्रवेश वर्जित रहता है।

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Updated on:
28 Sept 2018 03:52 pm
Published on:
28 Sept 2018 03:46 pm
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