मेघालय के बाद अब त्रिपुरा में भी उठने लगी है मांग
अगरतला। मेघालय के बाद त्रिपुरा में गैर आदिवासी पुरुषों से विवाह करने वाली आदिवासी लड़कियों से अनुसूचित जनजाति का दर्जा छीनने की मांग उठने लगी है। हाल ही में त्रिपुरा के जनजातीय संगठन इंडीजनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा-तिप्राहा (आइपीएफटी-टी) ने कहा कि अपनी जाति से बाहर शादी करने पर अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा छीने जाने से संबंधित कानून 29 नवंबर से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में ही पारित किया जाए, ताकि एसटी दर्जे का दुरुपयोग न हो सके।
इंडीजिनस पीपुल्स फ्रंट आॅफ त्रिपुरा (आइपीएफटी-टी) के उपाध्यक्ष बुधु देबबर्मा ने कहा कि त्रिपुरा के खोवई जैसे इलाकों में जनजाति से बाहर विवाह के मामले बढ़ रहे हैं, जहां 50 फीसदी जनजातीय स्त्रियां, गैर-जनजातीय पुरुषों का हाथ थाम रही हैं। गैर आदिवासी लड़के, एसटी पत्नी के नाम पर रोजगार और लाइसेंस परमिट के मौके हथिया रहे हैं। आईपीएफटी ने कहा है कि हम चाहते हैं कि ऐसी शादियों पर रोक लगाई जाए। गौरतलब है कि आईपीएफटी त्रिपुरा में भाजपा सरकार में शामिल है। अलग राज्य की मांग करने वाले देबबर्मा ने कहा, दिसंबर में हम अपनी इस मांग के समर्थन में दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करेंगे।
मेघालय में पारित हो चुका है विधेयक
चार महीने पहले मेघालय के खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (केएचएडीसी) ने एक विधेयक पारित किया था। इसके अनुसार गैर आदिवासी पुरुषों से विवाह करने वाली खासी जनजातीय स्त्रियों को एसटी दर्जे से वंचित कर दिया जाएगा।