
नई दिल्ली। किसानों और सरकार के बीच बातचीत का दौर जारी है। मगर अभी तक दोनों के बीच कोई भी सहमति नहीं बन सकी है। देश में लगातार 11वें दिन आंदोलन जारी है। किसान सिंघु, टीकरी, दिल्ली-गाजियाबाद, चिल्ला व अन्य सीमाओं अपना मोर्चा संभाले हुए हैं।
इस बीच भारतीय पर्यटक परिवहनकर्ता एसोसिएशन(ITTA)और दिल्ली गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने 8 दिसंबर को किसानों के विरोध के साथ एकजुटता के साथ हड़ताल का आह्वान किया है।
आईटीटीए के अध्यक्ष सतीश शेरावत कहना है कि 51 यूनियनों ने किसानों का समर्थन करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि खेती और परिवहन एक पिता के 2 पुत्रों की तरह हैं। वहीं दिल्ली गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष परमीत सिंह गोल्डी कहना है कि “हम अपने किसान भाइयों का समर्थन कर रहे हैं। आखिर वे हमारे व्यवसाय की जड़ें हैं।
केंद्र सरकार से शनिवार को भी हुई बातचीत बेनतीजा रही है। इस पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) अध्यक्ष शरद पवार का कहना है कि कि यह परेशानी सरकार की जल्दबाजी के कारण खड़ी हुई है। उन्होंने सरकार पर उनकी बात न सुनने का आरोप लगाया।
शरद पवार के अनुसार,'पंजाब और हरियाणा के किसान गेहूं और धान के मुख्य उत्पादक रहे हैं। वे लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में अगर जल्द हल न निकला तो हम देखेंगे कि देश भर के किसान उनके साथ हो जाएंगे।'