अमरीका को प्रभावित करने के लिए 10 करोड़ अमरीकी डॉलर खर्च करने के बाद भी तेल समृद्ध इस देश के लिए उसके साथ संबंधों पर अब संकट खड़ा हो गया है।
सऊदी मूल के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले को लेकर अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद बयान दे रहे हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि वह इस मामले की तह तक जाएंगे। जल्द ही इस मामले में और तथ्य सामने आएंगे।
जानकारों के अनुसार- स्वनिर्वासित सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास में हत्या होने के बाद सऊदी अरब के खिलाफ अंततराष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश उभरा है। जबकि पिछले वर्षों में ऐसा कुछ नहीं देखा गया। मामले का असर अमरीका और सऊदी अरब के संबंधों पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। इसका ताजा उदाहरण अमरीका के सांसदों द्वारा कभी न सोचे जाने वाले प्रस्ताव हैं, जो उन्होंने सऊदी अरब के बारे में पास किए हैं। इसमें सऊदी अरब के साथ हथियारों की बिक्री को स्थगित करना और उसके राजदूत को निष्कासित करना शामिल है।
जानकारों के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी अरब अमरीकी हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है। हालांकि इस सबके बीच अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की ही बात कही है।
जानकारों के अनुसार- अमरीका पर 11 सितंबर, 2001 को 19 विमान अपहर्ताओं ने हमला किया था, जिनमें से 15 सऊदी अरब के थे। इसके बाद सऊदी अरब ने अमरीका के साथ संबंधों को बचाने के लिए लॉबिंग शुरू की। अमरीका को प्रभावित करने के लिए 10 करोड़ अमरीकी डॉलर खर्च करने के बाद भी तेल समृद्ध इस देश के लिए उसके साथ संबंधों पर अब संकट खड़ा हो गया है। अब सऊदी शहजादे के साथ मित्रता के लिए उत्साहित रहने वाले अमरीकी सांसद और संस्थान भी रियाद से दूरी बना रहे हैं।
फॉरेन इन्फ्लुएंस ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव एट द सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी के निदेशक बेन फ्रीमैन के अनुसार- ‘ज्यादातर अमरीकी, सऊदी अरब के बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं।' खशोगी के लापता होने के बाद कम से कम चार लॉबिंग कंपनियों ने कहा है कि वे अब सऊदी अरब का प्रतिनिधत्व नहीं करेंगी.