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High Court order: लॉटरी सिस्टम से बनीं नगरपालिका अध्यक्ष, हारी उम्मीदवार ने हाईकोर्ट में दी चुनौती, न्यायाधीश ने सुनाया ये फैसला

High Court order: वर्ष 2021 में बैकुंठपुर नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के दोनों महिला उम्मीदवारों को मिले थे एकसमान मत, फिर सभी की सहमति से लॉटरी पद्धति से हुई थी विजेता की घोषणा

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High court order

CG High Court (Photo- Patrika)

बैकुंठपुर। वर्ष 2021 में हुए नगर पालिका बैकुंठपुर के चुनाव में 2 उम्मीदवारों को समान मत प्राप्त हुए थे। इसके बाद दोनों उम्मीदवारों के अलावा सभी पार्षदों की सहमति से लॉटरी सिस्टम से नपाध्यक्ष का चयन किया गया। इसमें भाजपा की नविता शैलेष शिवहरे विजयी हुई थीं। इसके बाद हारी हुई उम्मीदवार ने इस फैसले के विरुद्ध जिला न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की। मई 2025 को जिला न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अपील प्रस्तुत की। इस पर 10 अप्रैल को फैसला सुनाते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (High Court order) ने भी अपील को खारिज कर दिया।

कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर की नगरपालिका परिषद का आम चुनाव दिसंबर 2021 में संपन्न हुआ था। चुनाव अधिकारी ने विजयी पार्षदों की उपस्थिति में 1 जनवरी 2022 को नपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराया। इस दौरान नपाध्यक्ष पद के लिए दो उम्मीदवार भाजपा (High Court order) से नविता शिवहरे और कांग्रेस से साधना जायसवाल मैदान में उतरीं थी।

दोनों अभ्यार्थियों को समान मत प्राप्त होने पर दोनों अभ्यर्थियों और सभी पार्षदों की सहमति से लॉटरी सिस्टम से निर्णय लिया गया। इसमें भाजपा की नविता शैलेश शिवहरे (High Court order) को नपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया था। मामले में चुनाव की पूरी प्रक्रिया में पूर्ण सहमति देने, अपना हस्ताक्षर करने के बाद पराजित अभ्यर्थी साधना जायसवाल ने जिला न्यायालय बैकुंठपुर में चुनाव के खिलाफ याचिका प्रस्तुत की थी।

करीब 3 वर्षों तक न्यायालय में सभी प्रक्रिया, मत पेटी का निरीक्षण तथा दोनों पक्षों के साक्ष्यों का परीक्षण कराया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 7 मई 2025 को साधना जायसवाल की चुनाव याचिका (High Court order) खारिज कर दी।

High Court order: हाईकोर्ट में की थी अपील

जिला न्यायालय के आदेश के विरुद्ध साधना जायसवाल के वकील ने उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ में अपील प्रस्तुत की। जहां विद्वान अधिवक्ताओं के तर्क सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 23 फरवरी 2026 को निर्णय सुरक्षित रख लिया।

मामले में 10 अप्रैल को हाईकोर्ट (High Court order) ने अपना फैसला सुनाया और जिला एवं सत्र न्यायालय के निर्णय को यथावत रख साधना जायसवाल की अपील को निरस्त कर दिया है। नपाध्यक्ष नविता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष गुप्ता, चंद्रेश श्रीवास्तव, शशांक गुप्ता ने हाईकोर्ट में पैरवी की।