
नई दिल्ली। राजधानी स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में बीते रविवार 5 जनवरी को हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को खुलासा किया। इसके बाद राजनीति तेज हो गई और हर तरफ से बयानबाजी शुरू हो गई। वहीं, छात्रों के एक समूह ने जेएनयू कैंपस में प्रदर्शन भी किया, जबकि आरोपी करार दिए गए छात्रों ने पुलिस पर ही सवालिया निशान लगाए।
इस बारे में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जो लोग लोकसभा में एक सीट और तीन-चार सीट हैं, वो लोग समझते हैं कि कभी जाधवपुर हो और कभी जेएनयू हो, यहां से प्रायोजित विरोध करवा के मोदी सरकार को गिराने की कोशिश करेंगे, तो सफल नहीं होंगे।
वहीं, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जेएनयू हिंसा की दिल्ली पुलिस द्वारा की गई जांच पर शुक्रवार को कहा कि सच्चाई सामने आ गई है। उन्होंने कहा कि पहले ऐसा लगता था कि सिर्फ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लोग ही हिंसा में शामिल थे।
जावड़ेकर ने कहा, "अब बात साफ हो गई है कि हिंसा में लेफ्ट के लोग बड़े पैमाने पर शामिल थे। जेएनयू में पेरियार हॉस्टल में लेफ्ट के लोगों ने विद्यार्थी परिषद के बच्चों के साथ मारपीट की, चुन चुन कर पीटा। एक जनवरी को जेएनयू के सर्वर रूम को तोड़ा गया। छात्रों को रजिस्ट्रेशन से जबरन रोका गया। अब साफ है कि कुछ राजनीतिक पार्टियों के उकसावे पर छात्रों ने तोड़-फोड़ की और मार-पीट की। जिन नौ लोगों को पुलिस ने नामजद किया है, उसमें से सात वामपंथी स्टूडेंट्स हैं।"
जावड़ेकर ने आरोप लगाया, "कांग्रेस, आप और लेफ्ट के इशारे पर हिंसा फैलाई गई। हर साल जेएनयू पर 800 करोड़ रुपये खर्च होता है। यह पैसा जनता की गाढ़ी कमाई है। छात्र सोचें कि उनके माता-पिता उनको पढ़ने के लिए जेएनयू भेजते हैं, न कि राजनीति के लिए।"
इससे पहले शुक्रवार शाम को जेएनयू के छात्रों ने कैंपस के भीतर पांच जनवरी को हुई हिंसा को लेकर प्रदर्शन किया और बैनर-पोस्टर लेकर परिसर में अपना विरोध जताया।
जबकि जेएनयू के कुलपति एम जगदीश कुमार ने कहा, "हम यह भी चाहते हैं कि जांच की रिपोर्ट आए और अगर दोषियों की पहचान हो जाती है तो हमें उम्मीद है कि उन्हें दंडित किया जाएगा।
वहीं, शुल्क को लेकर उन्होंने कहा, "अब कोई सर्विस और यूटिलिटी शुल्क नहीं है, छात्रों को केवल कमरे का किराया देना होगा जो कि 300 रुपये है। छात्रों से लिया गया पैसा केवल छात्रों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए उपयोग किया जाएगा।"
कुलपति ने आगे कहा, "हजारों छात्र शीतकालीन सेमेस्टर परीक्षा के लिए पंजीकरण कर रहे हैं। जेएनयू प्रशासन बहुत लचीला है और हम छात्रों की सुविधा के लिए सब कुछ कर रहे हैं। अनुकूल माहौल है और मैं छात्रों से वापस आने की अपील करता हूं।"
इन सबके बीच जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा, "इस देश की कानून व्यवस्था पर पूरा विश्वास है कि जांच निष्पक्ष होगी। मुझे न्याय मिलेगा। लेकिन दिल्ली पुलिस पक्षपात क्यों कर रही है? मेरी शिकायत एफआईआर के रूप में दर्ज नहीं की गई है। मैंने कोई मारपीट नहीं की है।"
उन्होंने आगे कहा, "हमने कुछ भी गलत नहीं किया है। हम दिल्ली पुलिस से नहीं डरते। हम कानून द्वारा खड़े होंगे और शांति और लोकतांत्रिक तरीके से अपने आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। दिल्ली पुलिस अपनी पूछताछ कर सकती है। मेरे पास यह दिखाने के लिए सबूत भी हैं कि मुझ पर कैसे हमला किया गया।"
इससे पहले घोष ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव अमित खरे से मुलाकात की और मीडिया को बताया, "हमनें उनसे मांग की है कि जेएनयू के कुलपति को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटाया जाए क्योंकि वह विश्वविद्यालय चलाने के योग्य नहीं हैं। हमें एक नए कुलपति की जरूरत है ताकि एक नई शुरुआत की जा सके और कैंपस में सामान्य माहौल बन सके।"