आशंका जताई जा रही है कि राज्य में बिगड़ते सियासी हालात का फायदा उठाकर आतंकी अमरनाथ यात्रा को अपना निशाना बना सकते हैं।
नई दिल्ली। पीडीपी-भाजपा गठबंधन में टूट के बाद जम्मू-कश्मीर में सियासी संकट खड़ा हो गया है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को पार्टी नेताओं के साथ बातचीत के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा कर दी। बताया जा रहा है कि गठबंधन में टूट के बाद राज्य की सीएम महबूबा मुफ्ती शाम को अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप देंगी। वहीं दूसरी राज्य में पैदा हुए सियासी घमासान से 28 जून से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। आशंका जताई जा रही है कि राज्य में बिगड़ते सियासी हालात का फायद उठाकर आतंकी अमरनाथ यात्रा को अपना निशाना बना सकते हैं।
घाटी में 200 आतंकी सक्रिय
बता दें कि अमरनाथ यात्रा पर बढ़ रहे आतंकी हमले के खतरे को भांपते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार ने 22 हजार अतिरिक्त जवानों की मांग की थी। जानकारी के अनुसार पिछले साल अमरनाथ यात्रा के दौरान 35 हजार जवान तैनात किए गए थे, जबकि इस बार 22 हजार अतिरिक्त जवानों की डिमांड की गई है। राज्य पुलिस के अनुसार घाटी में 200 आतंकी सक्रिय हैं। आशंका जताई जा रही है कि ये आतंकी अमरनाथ यात्रा जैसे किसी बड़े आयोजन को अपना निशाना बना सकते हैं। ऐसे में राज्य में बिगड़ते सियासी हालात का ये आतंकी फायदा उठाने का प्रयास कर सकते हैं।
राज्यपाल शासन हो सकता है लागू
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी अमरनाथ यात्रा को लेकर चिंता जाहिर की है। मंत्रालय को डर है कहीं आतंकी तीर्थयात्रियों को निशाना न बना दें। राजनीतिक जानकारों के अनुसार अमित शाह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से वार्ता कर जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू करने की सिफारिश कर सकते हैं।