विविध भारत

शंकराचार्य जयेंद्र सरस्‍वती : जानिए, उनके जीवन से जुड़ी 10 खास बातें

शंकराचार्य जयेंद्र ने कांची पीठ को नई पहचान देने के साथ भारतीय पंरपरा के प्रचार-प्रसार पर सबसे ज्‍यादा जोर दिया।

2 min read

नई दिल्‍ली. कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती बीते बुधवार को ब्रह्मलीन हो गए। आज उनके पार्थिव शरीर को महासमाधि दी गई। उनके अंतिम दर्शन करने के लिए राजनीतिक हस्तियों सहित एक लाख से अधिक लोग कांची पीठ पहुंचे। वह अयोध्‍या विवाद सुलझाने के बहुत करीब पहुंच चुके थे। यही कारण है कि देश और दुनिया के लोग उनका सम्‍मान करते हैं। इसके अलावा उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जिन्‍हें बहुत कम लोग जानते हैं। आप भी जानिए उनसे जुड़ी 10 खास बातें :

1. शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का वास्तवकि नाम सुब्रमण्यन महादेव अय्यर था। इनका जन्म 18 जुलाई 1935 को हुआ था।

ये भी पढ़ें

शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती का पांचवे मठ का सपना अधूरा, जानिए रीवा में क्यों चाहते थे स्थापना


2. 68वें शंकराचार्य चन्द्रशेखरेंद्र सरस्वती ने स्‍वामीगल ने 22 मार्च, 1954 को सुब्रमण्यम महादेव अय्यर को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया और उन्‍होंने उनका नया नाम जयेंद्र सरस्‍वती रखा।


3. जयेंद्र सरस्वती को वेदों का ज्ञाता माना जाता था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी इनके प्रशंसकों में से एक थे।


4. शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने अयोध्या विवाद के हल के लिए भी पहल की थी। हालांकि इस बात के लिए तब जयेंद्र सरस्वती को आलोचना का शिकार भी होना पड़ा था।


5. उन्होंने मठ को एक नई दिशा दी। पहले मठ सिर्फ आध्यात्मिक कार्यों तक सीमित होता था। उन्होंने मठ को सामाजिक कार्यों से जोड़ा। यही कारण है कि वो देशभर में लोकप्रिय हुए।


6. शंकराचार्य ने हिंदुओं के प्रमुख केंद्र कांची कामकोटि मठ को शक्तिशाली बनाया। यही कारण है कि NRI और राजनीतिक शख्सियतों ने यहां की गतिविधियों से खुद को जोड़ा। कांची मठ कई स्कूल और अस्पताल भी चलाता है। मशहूर शंकर नेत्रालय मठ की तरफ से संचालित है।


7. शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने 1983 में शंकर विजयेंद्र सरस्वती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।


8. नवंबबर, 2004 को कांची मठ के मैनेजर शंकररमन की हत्या के आरोप में जयेंद्र सरस्वती को गिरफ्तार भी किया गया था। उस वक्त तमिलनाडु में जयललिता मुख्‍यमंत्री थीं। जयललिता जयेंद्र सरस्वती को अपना अध्यात्मिक गुरु मानती थीं। शंकररमन मर्डर केस में पुडुचेरी की अदालत ने 27 नवंबर, 2013 को कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती सहित सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया।


9. वह मठ के जरिए समाज के सबसे निचले स्तर पर खड़े लोगों को मदद पहुंचाने के लिए हमेशा प्रयासरत रहे। पहले इस मठ का प्रभाव तामिलनाडु तक सीमित था। वो इसे उत्तर-पूर्वी राज्यों तक ले गए। वहां उन्होंने पीठ की तरफ से स्कूल और अस्पताल शुरू किए।


10. सामाजिक कार्यों में मठ की सक्रियता को लेकर मतभेदों की वजह से वो 1980 में बिना बताए कांचीपुरम मठ छोड़कर कर्नाटक चले गए। बाद में वो कांचीपुरम दोबारा लौटे थे।

ये भी पढ़ें

जीवन में अहंकार से मुक्ति के लिए बौद्ध भक्‍तों ने मनाया गोचक
Updated on:
01 Mar 2018 02:43 pm
Published on:
01 Mar 2018 02:42 pm
Also Read
View All
Surguja weather: दोपहर बाद सरगुजा में बदला मौसम का मिजाज, 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा, गिरे पेड़

Jabalpur cruise accident: झुमका जलाशय में भी हो सकता है जबलपुर जैसा हादसा! क्रूज से कराते हैं सैर, लेकिन पर्याप्त लाइफ जैकेट नहीं, डस्टबीन में मिलीं शराब की बोतलें

Children drowned: नदी में नहाने उतरे 2 मासूम बालक-बालिका की डूबकर मौत, किनारे पड़े थे कपड़े, लेकिन गायब थे बच्चे

International Labour Day: अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर महापौर और सभापति ने सफाई कर्मियों के पखारे पैर, किया सम्मानित

IG action in fire case: पटाखा-प्लास्टिक गोदाम में आग: संचालकों पर लगी धारा देख IG हुए नाराज, कहा- इसमें गैर जमानती धाराएं क्यों नहीं जोड़ी?