अटल बिहारी वाजपेयी लंबे समय से डिमेंशिया से हैं पीड़ित हैं। इस वजह से वह न तो ठीक से बात कर पाते हैं और न ही किसी को पहचानते हैं।
नई दिल्ली : भारत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को अचानक एम्स में भर्ती कराया गया। इसके बाद से उनका हाल जानने के लिए प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई नेता एम्स जा चुके हैं। पूरा देश उनके लिए चिंतित है और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानना चाहता है। उन्हें यूरिन इन्फेक्शन और किडनी संबंधी परेशानियों के चलते एम्स में भर्ती कराया गया है। उनका डायलिसिस चल रहा है। फिलहाल वे एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया की निगरानी में हैं। लेकिन वह लंबे समय डिमेंशिया नामक बीमारी से पीड़ित हैं। खबर तो यहां तक है कि वह न ठीक से बात कर पाते हैं और न ही किसी को पहचानते हैं।
आखिर क्या है यह बीमारी
बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी को यूरिन इन्फेक्शन और किडनी संबंधी परेशानियों के चलते एम्स में जरूर भर्ती कराया गया है, लेकिन वह लंबे समय से डिमेंशिया नामक बीमारी से पीड़ित हैं। डाइमेंशिया अपने आप में कोई बीमारी नहीं, बल्कि इसमें इंसान की याददाश्त कमजोर पड़ जाती है और वह अपने दैनिक जीवन का काम भी सामान्य रूप से नहीं कर पाता है। इसकी वजह से इस व्यक्ति से बीमार आदमी के दैनंदिन जीवन में कई समस्याएं पैदा हो जाती है।
ये होती है समस्या
डिमेंशिया के पीड़ित अमूमन लोग अलजाइमर के शिकार होते हैं। इनमें शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस के लक्षण भी देखने को मिलते हैं। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के मूड में बार-बार बदलाव आता रहता है। ऐसे लोग छोटी-छोटी बातों पर परेशान हो जाते हैं या डिप्रेशन में चले जाते हैं और उदास और दुखी रहने लगते हैं। डिमेंशिया बढ़ने पर कुछ लोग अजीबो-गरीब हरकतें भी करने लगते हैं। कई लोग मनोग्रस्तता बाधा डिसऑर्डर के भी शिकार हो जाते हैं और एक ही गतिविधि या बात बार-बार दोहराते रहते हैं। इस वजह से उनके आसपास के लोग परेशान हो जाते हैं। कई केसों में यह भी देखा जाता है कि जब डाइमेंशिया अधिक बढ़ जाता है तो वे शारीरिक रूप से भी कमजोर होने लगते हैं। उनका वजन कम होने लगता है। पाचनशक्ति खराब रहने लगती है। सोने-जागने का समय भी अनियमित हो जाता है। अक्सर यह बीमारी 65 साल के बाद ही आक्रमण करती है।
अगर ये लक्षण दिखे तो हो सकता है डाइमेंशिया
अगर किसी व्यक्ति को नाम, जगह या फिर तुरंत की गई बातचीत को भी याद रखने में परेशानी हो रही हो या फिर निर्णय लेने की क्षमता का प्रभावित हो गई हो अथवा संवाद स्थापित करने और बात करने में दिक्कत हो रही हो या फिर चीजों को रखकर भूल जाता हो। इस बीमारी में व्यक्ति को अवसाद से पीड़ित होने लगता है और अल्पकाल में उसका व्यवहार अचानक से परिवर्तित हो जाता है। इसके अलावा वह खाने-पीने या कुछ निगलने में दिक्कत महसूस कर रहा हो या चलने-फिरने में परेशानी हो रही हो तो व्यक्ति को डाइमेंशिया हो सकता है।