Ladakh में China से लंबा गतिरोध का जवाब देने के लिए Indian Army की तैयारी चरम पर। ठंड में लद्दाख और LAC से सटे क्षेत्रों में Temperature शून्य से नीचे रहता है एलएसी पर Indian Army के साथ IAF और Navy को हमेशा Alert mode में रहने का निर्देश।
नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख ( East Ladakh ) से लगे वास्तविक नियंत्रण रेखा ( LAC ) को लेकर चीन ( China ) के रुख और उसके जुबानी झांसे में आने के लिए इस बार इंडियन आर्मी ( Indian Army ) तैयार नहीं है। यही वजह है कि एलएसी पर गतिरोध खत्म होने के आसार के बदले बरकरार रहने के चांसेज ज्यादा हैं। फिर दगाबाज चीन के इतिहास को देखते हुए आगामी ठंड में सीमा पर सामरिक ताकत ( Strategic strength ) को बनाए रखने के लिए भारतीय सेना ने युद्ध स्तर ( War Level ) पर अपनी तैयारियों को अमली जामा पहनाने का काम शुरू कर दिया है।
सेना ने आगामी रणनीति के तहत एलएसी से सटे इलाकों में तैनात फौज, टैंक और अन्य हथियारों में कई कमी नहीं करने का निर्णय लिया है। जबकि ठंड के दिनों में इस क्षेत्र में तापमान ( Temperature ) अधिकतम समय शून्य से नीचे ही रहता है।
जानकारी के मुताबिक भारतीय वायुसेना ठंड के मौसम में भी वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे क्षेत्रों में अलर्ट मोड ( Alert mode ) रहेगी। वहीं भारतीय नौसेना हिंद महासागर ( Indian Ocean ) में अपनी आक्रामक गश्त लगाएगी। इंडियन आर्मी पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक चलने वाले इस गतिरोध के मद्देनजर य़ुद्ध की तैयारी में जुटी है।
इतना ही नहीं सैन्य और रणनीतिक सलाहकारों ने शनिवार को पूर्वी लद्दाख और एलएसी के अन्य जगहों पर तैयारियों को लेकर समीक्षा की। वहीं सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे परिचालन तैयारियों से संबंधित मामलों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नियमित रूप से अपडेट दे रहे हैं।
बता दें कि लद्दाख इलाके में ऊंचाई वाले क्षेत्र में सैनिकों और हथियारों के मौजूदा स्तर को बनाए रखने के लिए व्यापक तैयारियों की आवश्यकता होगी। ऐसा इसलिए कि पीक सर्दियों के महीनों में इस क्षेत्र में तापमान शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है। इसलिए भारतीय सेना अपनी तैनाती का मौजूदा स्तर बरकरार रखने की तैयारी में जुटी है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार ( Central Government ) ने लद्दाख क्षेत्र में तैनात अपने जवानों के लिए आवश्यक कपड़ों और अन्य उपकरण की खरीदारी आरंभ कर दी है। हालांकि दोनों देशों की सेनाएं को उम्मीद है कि पैंगोग त्सो पर फिंगर प्वाइंट से बलों को पीछे हटाने की प्रक्रिया का समाधान आगामी कोर कमांडर स्तर की वार्ता में निकला लिया जाएगा।