जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने बड़ी घटना को अंजाम दिया है। जैश के ने सीआरपीएफ के काफिले पर अब तक का बड़ा हमला किया है।
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने बड़ी घटना को अंजाम दिया है। जैश के ने सीआरपीएफ के काफिले पर अब तक का बड़ा हमला किया है। गुरुवार को हुए इस आतंकी हमले में 44 जवान शहीद हो गए हैं, जबकि 45 से अधिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस बीच सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि पुलवामा हमले का शिकार हुए जिन सैनिकों को शहीद कहकर पुकारा जा रहा है। उन सैनिकों को शहीद का दर्जा नहीं मिलेगा। दरअसल, पैरामिलिट्री फोर्स में शामिल सीआरपीएफ बीएसएफ, आईटीबीपी का कोई जवान अगर ड्यूटी करता हुए किसी हमले में मारा जाता है तो उसको शहीद का दर्जा नहीं मिलता।
वहीं इंडियन आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के जवान अगर ड्यूटी के दौरान जवान गवांते हैं तो उनको शहीद का दर्जा मिलता है। इसका एक कारण यह भी है कि इंडियन आर्मी, नेवी और एयर फोर्स भारतीय रक्षा मंत्रालय के तहत काम करता है, जबकि पैरामिलिट्री फोर्सेज केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आते हैं। आपको बता दें कि इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है। इस आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकी का नाम आदिल अहमद डार है। डार मूलरूप से पुलवामा जिले के काकपोरा का ही रहने वाला है। जानकारी के अनुसर आदिल पिछले साल ही खूंखार आतंकी जाकिर मूसा के संगठन गजवत उल हिंद में शामिल हुआ था।
गौरतलब है कि गुरुवार दोपहर बाद 3:30 बजे श्रीनगर हाईवे पर सुरक्षाबलों का 70 गाड़ियों का काफिला गुजर रहा था, जिसमें लगभग 2500 जवान सवार थे। तभी पुलवामा में अवंतीपोरा के गोरीपोरा इलाके में आतंकियों ने विस्फोटक भरी गाड़ी से काफिले के एक वाहन पर आत्मघाती हमला कर दिया।