सोशल मीडिया पर #MeToo हैशटैक के साथ महिलाएं काम के दौरान अपने साथ हुए शोषण पर खुलकर बोल रही हैं।
नई दिल्ली। #MeToo यानि 'मैं भी' हैशटैग इन दिनों भारत में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर इस हैशटैक के साथ महिलाएं काम के दौरान अपने साथ हुए शोषण पर खुलकर बोल रही हैं। लेकिन कई महिलाएं ऐसी भी हैं, जिन्हें #MeToo से बने माहौल के बावजूद सार्वजनिक तौर पर अपने साथ हुए शोषण के बारें में बोलने का डर बना हुआ है। #MeToo की वजह से बॉलीवुड से लेकर, मीडिया हर जगह हलचल मची हुई है। महिला यौन शोषण को लेकर बड़ी-बड़ी हस्तियों से जुड़ी ख़बरें भी सामने आ रही हैं। लेकिन इन सब के बीच एक सवाल ये बना हुआ है कि कैसा बर्ताव यौन उत्पीड़न के अंतर्गत आता है।
इन बातों को नहीं रख सकते यौैन उत्पीड़न में
1. किसी ऑफिस में महिला और पुरुष का एक साथ काम करना साधारण बात है। इस दौरान सहमति से दोनों का हाथ मिलाना, बातें करना, तारीफ या मजाक करना और बातों में सेक्सुअल भाषा का प्रयोग करना आम बात है। ये सेक्सुअल हरासमेंट में नहीं आता।
2. सहमति से कंधे पर हाथ रखना, कार्यालय में चाय-कॉफी या शराब पीना या फिर किसी बात की बधाई देते हुए गले लगाना इन बातों में कुछ भी गलत नहीं। इसे शारीरिक शोषण के अंदर नहीं रखा जा सकता।
3. वहीं, साथ काम करने वाले पुरुष कर्मचारी, महिला कर्मचारी को कोई आपत्ती जनक फोटो भेजे या दिखाए और महिला इसका विरोध करे तो ये भी यौन शोषण के अंतर्गत आता है।
4. महिला और पुरूष का एक दूसरे की तरफ आकर्षित होना सहज बात है। ये बातें किसी भी कार्यलय में हो सकती है। ऐसा होने पर व्यक्ति अपनी सहकर्मी को ये साफ तौर पर कहकर या फिर उसे बताने की कोशिश करेगा ये यौन उत्पीड़न में नहीं आता। हां अगर महिला इन बातों से आपत्ती जताए और पुरुस इसे बार-बार दोहराय, महिला को सेक्सुअस तरीके से छुने की कोशिश करें तो इसे यौन उत्पीड़न कहा जाएगा।
5. अगर औरत अपने सहकर्मी द्वार किए जा रहे बर्ताव को पसंद करती है, वो इसमें और आगे बढ़ती है। किस करने या शारीरिक संबंध बनाने को तैयार हो जाती है तो यह दो वयस्क की आपसी सहमति कहलाएगी। इसे बाद में उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता।