मां के लिए संतान की उपलब्धि उसे गर्व महसूस कराती है, वहीं मां के प्रति संतान की श्रद्धा इस रिश्ते को गौरवान्वित करती है।
नई दिल्ली। दुनिया भर में रविवार को मदर्स डे मनाया जा रहा है। यह मौका मां और संतान के रिश्ते को मजबूती देता है। मां के लिए संतान की उपलब्धि उसे गर्व महसूस कराती है, वहीं मां के प्रति संतान की श्रद्धा इस रिश्ते को गौरवान्वित करती है। दुनिया भर में ऐसी कई हस्तियां हैं, जिनपर अगर मां का हाथ न होता तो शायद वह इस उपलब्धि तक नहीं पहुंच सकते थे। आइए जानते हैं इन ताकतवर शख्सियतों के बारे में।
गुजरात के पूर्व सीएम और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा से कहा है कि उनकी मां के आशीर्वाद से आज वह इस मुकाम पर पहुंच सके हैं। गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर में 17 सितंबर 1950 को जन्मे मोदी की मां का नाम हीराबेन मोदी है। 1920 में पैदा हुईं हीराबेन शुरुआत से ही बेहद सादा जीवन जीने में यकीन रखती हैं और आज भी साधारण जिंदगी जी रहीं हैं। पिछले साल वह प्रधानमंत्री के सरकारी आवास पर कुछ दिन रहीं थीं। इस दौरान पीएम ने अपनी मां के साथ कुछ पल बिताए थे। आज भी हीराबेन एक छोटे से पुराने घर में रहती हैं। वह अपने बेटे को टीवी पर देखती रहती हैं। पीएम मोदी बताते हैं कि बचपन में उनकी मां लोगों के घरों में काम करती थीं। उन्होंने बड़ी मुश्किलों में उन्हें पाल—पोसकर बड़ा किया।
दुनिया के सबसे ताकतवर और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मां का नाम मारिया इनानोवान पुतिना था। मारिया का जन्म 1911 में और उनका देहांत 1998 में हुआ था। पुतिन की मां एक फैक्ट्री वर्कर थीं। उन्होंने बड़ी मुश्किलों से व्लादिमीर पुतिन को पाला था। पुतिन चौथी बार रूस के राष्ट्रपति चुने गए हैं। पुतिन की आधिकारिक वेबसाइट पर बताया गया है कि उनकी मां बहुत दयालु महिला थीं और हम सभी बहुत साधारण ढंग से रहते थे।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मां क्वी जिन शेंझेन की रहने वाली थीं और राजनीति में सक्रिय थीं। बताया जाता है कि उनकी मां के अनुशासन प्रिय जीवन के कारण शी को यह सफलता हासिल हुई है। शी की मां ने उन्हें हमेशा साधारण जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।
अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति बराक ओबामा की मां स्टैनले ऐन डनहैम का जन्म 29 नवंबर 1942 को हुआ था। पेशे से एंथ्रोपोलॉजिस्ट स्टैनले काफी समय तक कैंसास मेें रहीं। बराक ओबामा जैसे दुनिया के ताकतवर नेता की मां ने स्कूल, बैंक, विश्व श्रम संगठन समेत कई जगहों काम किया। हालांकि वो ज्यादा उम्र तक नहीं जी सकीं और कैंसर की बीमारी के चलते 7 नवंबर 1995 को दुनिया से अलविदा कह गईं। ओबामा का कहना है कि उन्हें मां ने ही अन्याय के खिलाफ लड़ना सिखाया। उनके बताए गए सिद्धांतों पर वह आज भी चलते हैं।
देश के महानायक अमिताभ बच्चन के करियर में उनकी मां तेजी बच्चन का अहम योगदान रहा है। अमिताभ बताते हैं कि बचपन में उन्हें थियेटर के लिए उनकी मां ने हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया। इसकी वजह से वह फ़िल्म का रुख कर सके। वे बताते हैं कि मां ने उन्हें हमेशा हौसला कायम रखने को कहा। वह कहते है कि अगर मां का आशीर्वाद उनके साथ न होतो तो वह आज इस मुकाम तक नहीं पहुंच सकते थे।