विविध भारत

बारिश और बाढ़ के बीच चौंकाने वाला खुलासा, 10 साल में होंगी 16 हजार मौत

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन का आंकलन ऐसे ही रहे हालात तो आने वाले 10 साल के दौरान बारिश और बाढ़ से होंगी 16 हजार मौत।

2 min read
बारिश और बाढ़ के बीच चौंकाने वाला खुलासा, 10 साल में होंगी 16 हजार मौत

नई दिल्ली। देश का एक हिस्सा इन दिनों बारिश और बाढ़ का जबरदस्त दंश झेल रहा है। केरल में अब तक बारिश और बाढ़ से 20 हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है, जबकि मरने वालों की संख्या 370 पर पहुंच गई है। इस बीच एक दहला देने वाली खबर सामने आई है। दरअसल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी एनडीएमए ने आने वाले 10 साल में बारिश और बाढ़ से विनाश का एक अनुमान लगाया है। इस अनुमान में जो आंकड़े सामने आए हैं वो चौंकाने वाले हैं। एनडीएमए के मुताबिक आने वाले 10 साल के दौरान देशभर में बाढ़ की वजह से 16 हजार लोगों की मौत हो जाएगी, जबकि 47 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति बर्बाद होगी।

ये भी पढ़ें

केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए देवदूत बनी वायुसेना, ऐसे की मदद

गुजरात में 10 साल से कोई आंकलन ही नहीं किया
रिपोर्ट पर गौर करें तो ज्यादातर राज्यों ने अब तक खतरों का विस्तृत राज्यवार आंकलन, आपदा के बदलते जटिल स्वरूप और उससे बचाव के बारे में कोई काम नहीं किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 'गुजरात ने एक दशक पहले आपदा के खतरों का विस्तार से आंकलन किया था लेकिन बाद में इसमें कोई अपडेट नहीं हुआ, न ही इसे आम जनता के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया गया।'

हिमाचल में हुआ बेहतर काम
एनडीएमए की रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में नजर दौड़ाई जाए तो राज्यों की ओर से किए गए आंकलन काफी नीचले स्तर पर हैं। एनडीएमए की रिपोर्ट में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश को छोड़कर किसी भी राज्य ने विस्तृत रूप से आपदा के खतरों का आंकलन नहीं किया है। साथ ही इस काम में किसी प्रफेशनल एजेंसी से मदद नहीं ली गई।

गृहमंत्रालय ने भी सिर्फ एक आंकलन किया
आपको बता दें कि गृह मंत्रालय ने हाल ही में देश के 640 जिलों में आपदा के खतरों के बारे में एक आंकलन किया है। इस आंकलन के मुताबिक डीआरआर के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रदर्शन के आधार पर एक नैशनल रिजिल्यन्स इंडेक्स (एनआरआई) तैयार किया गया है। इसमें जोखिम का आंकलन, जोखिम से रोकथाम और आपदा के दौरान राहत जैसे मापदंड शामिल हैं। अध्ययन के मुताबिक हम अभी शुरुआती स्टेज में हैं और आपदा से जूझने में हमारा स्तर बहुत नीचे है। इसमें बहुत अधिक सुधार की जरूरत है।

भारत के पास काफी एडवांस्ड सैटलाइट और पूर्व चेतावनी प्रणाली है, जिसकी मदद से मौसम का पूर्वानुमान लगाते हुए मौतों की संख्या में कमी लाई जा सकती है। बावजूद अब तक सारी कवायद कागज पर नजर आती है। जब भी कोई आपदा सामने आती है, तो एनडीएमए ज्यादातर गाइडलाइन जारी करने, सेमिनार का आयोजन और बैठकें बुलाने तक सीमित दिखती है।

ये भी पढ़ें

केरलवासियों की मदद को आगे आए मुंबईकर, यूं बढ़ाए हाथ
Updated on:
20 Aug 2018 11:01 am
Published on:
20 Aug 2018 10:50 am
Also Read
View All
Water crisis in Mainpat: Video: मैनपाट में 100 बस्तियों के लोग पी रहे नदी-नाले का गंदा पानी, सीएम ने कलेक्टर को लगाया फोन, कहा- जल्दी व्यवस्था करो

Gang rape case: विधायक बोले- नाबालिग लड़कियों के साथ गैंगरेप की घटना सभ्य समाज के लिए कलंक, लेकिन कांग्रेसी सेंक रहे राजनीतिक रोटियां

Pickup accident: 30 बारातियों से भरी पिकअप पलटी, महिला समेत 2 की मौत, दर्जनभर घायलों में 4 की हालत गंभीर

Drowned in river: नदी में नहाने गए युवा चाचा-भतीजे की डूबकर मौत, दोस्त की बची जान, 10 दिन पहले डूब गए थे मामा-भांजी

Protest to put body on road: Video: महिला गार्ड का शव सडक़ पर रखकर परिजनों ने प्रदर्शन, संकल्प अस्पताल प्रबंधन से मुआवजे की मांग