'त्रिपुरा की मुख्य विपक्षी पार्टी सर्वोच्च न्यायालय में राज्य में एनआरसी लाने को लेकर जल्द याचिका दाखिल करेगी। हम इस मामले में नवंबर में नई दिल्ली में धरना देंगे।'
अगरतला। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह चार अक्टूबर को दिल्ली में जनजातीय संगठन आईएनपीटी के नेताओं से मुलाकात कर त्रिपुरा में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) की उनकी मांग पर चर्चा करेंगे। आईएनपीटी परामर्श परिषद के चेयरमैन सरोटा रंजन खिसा ने कहा, 'हमारे आग्रह के बाद गृहमंत्री ने इंडीजिनस नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ त्रिपुरा (आईएनपीटी) के अध्यक्ष बिजॉय कुमार हरेंगखॉल और महासचिव जगदीश देबबर्मा को हमारी मांग पर चर्चा के लिए बुलाया है।'
सुप्रीम कोर्ट जाएगी त्रिपुरा की विपक्षी पार्टी
खिसा ने कहा, 'त्रिपुरा की मुख्य विपक्षी पार्टी सर्वोच्च न्यायालय में राज्य में एनआरसी लाने को लेकर जल्द याचिका दाखिल करेगी। हम इस मामले में नवंबर में नई दिल्ली में धरना देंगे।' उन्होंने कहा कि आईएनपीटी ने पिछले महीने त्रिपुरा में एनआरसी की जरूरत को लेकर नई दिल्ली में भारतीय रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त को ज्ञापन सौंपा था। भारतीय जनता पार्टी के साथ सरकार में शामिल जनजातीय दल इंडीजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) भी इस मांग को लेकर सक्रिय है।
एनआरसी पर 10 बड़ी बातें...
1. 1971 में पाकिस्तान से आजाद होकर बांग्लादेश अलग देश बना था। तभी से कई लोग अवैध तरीकों से भारत में आकर बसने लगे।
2. 80 के दशक में अखिल असम छात्र संघ और असम गण परिषद के आंदोलन ने जोर पकड़ लिया।
3. 1985 तत्कालीन राजीव गांधी सरकार और आंदोलनकारियों के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत केंद्र ने आश्वासन दिया था कि अवैध बांग्लादेशियों को बाहर किया जाएगा।
4. 15 अगस्त 1985 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने असम अकॉर्ड की घोषणा की थी।
5. 1985 से लागू असम समझौते के अनुसार 24 मार्च 1971 की मध्य रात्रि तक असम में प्रवेश करने वाले लोगों और उनकी पीढ़ियों को भारतीय नागरिक माना जाएगा। लेकिन यह समझौता लागू नहीं हो पाया था।
6. 2013 में असम के कई संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
7. 2015 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और निगरानी में एनआरसी पर ड्राफ्टिंग का काम शुरू हुआ।
8. 2018 में जुलाई महीने में एनआरसी पर फाइनल ड्राफ्ट पेश किया गया।
9. मौजूदा समय में भारतीय जनता पार्टी इसे लागू करने के लिए जोर लगा रही है। असम विधानसभा चुनाव 2016 के लिए प्रचार के दौरान भी भाजपा ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था और 60 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी।
10. अभी इस मुद्दे का विरोध करने वालों में तृणमूल कांग्रेस सबसे मुखर है। वहीं विपक्ष के अधिकांश दल इस मसले पर तृणमूल के समर्थन में दिख रहे हैं।