31 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सील तोड़ने का मामला: मनोज तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगने से इनकार किया, कहा- मैं सीलिंग अधिकारी बनने को तैयार

देश की सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया था।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Saif Ur Rehman

•

Updated: 1 Oct 2018, 2:38 PM IST

Manoj tiwari

दिल्ली: चुनावों की तैयारियों में जुटी भाजपा, आज ‘पूर्वांचल महाकुंभ’ रैली में मनोज तिवारी की अग्निपरीक्षा

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत में हलफनामा दाखिल कर दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने माफी मांगने से इनकार कर दिया है। मनोज तिवारी ने हलफनामा दाखिल कर कहा है कि वह सीलिंग तोड़ने के लिए माफी नहीं मांगेंगे। साथ ही ये भी कहा गया कि मॉनिटरिंग कमेटी को भंग किया जाए, वो खुद सीलिंग अफसर बनने को तैयार हैं।

मॉनिटरिंग कमेटी को भंग करने को कहा

सील हुए घर का ताला तोड़ने को लेकर कोर्ट की अवमानना का सामना कर रहे मनोज तिवारी ने अपने हलफनामे में बताया है कि 'मैं सीलिंग तोड़ने के लिए माफी नहीं मांगूंगा। दिल्ली के लोगों को राहत देने और कानून का राज स्थापित करने के लिए मैं सीलिंग ऑफिसर बनने को तैयार हूं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी को बंद कर दे और मुझे सुप्रीम कोर्ट को सीलिंग की कार्रवाई करने में मदद करने दे'।मनोज तिवारी ने अपने हलफनामे में बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का कहीं भी उल्लंघन नहीं किया क्योंकि इस मामले में से निगरानी समिति के निर्देश का कोई लेना देना नहीं था। उन्होंने पूर्वी दिल्ली नगर निगम पर गैर कानूनी काम करने का आरोप लगाते हुए यह भी कहा है कि पता नहीं क्या वजह है कि मॉनिटरिंग कमेटी ने ओखला, जामिया, शाहीन बाग, नूर नगर और जौहरी फार्म्स जैसे क्षेत्रों में कोई सीलिंग नहीं की जबकि वहां पर पांच से सात मंजिला इमारतें बनी हुई हैं।

अलगाववादी आसिया अंद्राबी की गिरफ्तारी के मामले में आज पटियाला हाउस कोर्ट सुना सकता फैसला

क्या है मामला?

बता दें कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने 16 सितंबर को अपने संसदीय क्षेत्र के गोकुलपुर गांव के एक मकान की सीलिंग तोड़ी थी। इस मामले में उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। अगर यह मामला उनके खिलाफ गया तो उन्‍हें अवमानना का दोषी माना जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने मनोज तिवारी को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी कर 25 सितंबर को उनको अदालत में पेश होने के लिए कहा था। 25 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने मनोज तिवारी को फटकार लगाई थी और कहा था कि अगर उन्हें सीलिंग की इतनी जानकारी है तो क्यों ना कोर्ट उन्हें सीलिंग ऑफिसर बना दे, साथ ही देश की सबसे बड़ी अदालत ने मनोज तिवारी को 3 अक्टूबर तक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा था।