चार वर्षों से ज्‍यादा के कार्यकाल में केंद्र सरकार कई ऐसी योजनाएं लेकर आईं जिससे उनका कद बढ़ा है।
नई दिल्ली। आज पीएम नरेंद्र मोदी बनारस में अपना 68वां जन्मदिन मना रहे हैं। इसी के साथ पीएम के रूप में उन्होंने करीब साढ़े चार साल का कार्यकाल भी पूरा कर लिया है। इन चार सालों में उन्होंने युवाओं को नवाचार की राह पर लाने को लेकर कई योजनाओं की शुरुआत की। हालांकि युवाओं को रोजगार के भरपूर अवसर मुहैया कराने में विफल रहे हैं। विपक्ष ने इस बात का आरोप उन पर लगाया कि केंद्र सरकार यूपीए सरकार की योजनाएं की ही री-पैकेजिंग कर रही है। इसके बावजूद चार वर्षों से ज्यादा के कार्यकाल में सरकार कई ऐसी योजनाएं लेकर आईं जिससे देश और दुनिया में उनका कद बढ़ा है और युवाओं का दिल जीतने में कामयाब हुए।
पिछले चार वर्षों में युवा केंद्रित मोदी सरकार की प्रमुख योजनाएं
1. डिजिटल इंडिया
प्रधानमंत्री की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक डिजिटल इंडिया की शुरुआत 21 अगस्त 2014 को हुई। इस अभियान का मकसद भारत को एक इलेक्ट्रॉनिक अर्थव्यवस्था में बदलना है। सरकार की मंशा है कि सभी सरकारी विभाग और भारत की जनता एक दूसरे से डिजिटल रूप से या इलेक्ट्रॉनिक तौर पर जुड़ें। ताकि पारदर्शी और प्रभावी प्रशासन चलाया जा सके। इस योजना के तहत देश के सभी गांवों और ग्रामीण इलाकों को इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ना है पर जोर दिया गया। इस काम में सरकार को बहुत हद तक सफला भी मिली और ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अब बेहतर संचार नेटवर्क का लाभ उठा रहे हैं।
2. मेक इन इंडिया
इसके तहत भारत में वैश्विक निवेश और विनिर्माण को आकर्षित करना है। इस योजना की शुरुआत 25 सितंबर, 2014 को मोदी ने किया था। यह आगे चलकर यह एक इंटरनेशनल मार्केटिंग अभियान का हिस्सा बन गया। मेक इन इंडिया अभियान इसलिए शुरू किया गया, जिससे भारत में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा हों और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। इसका एक उद्देश्य देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति देना और घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों की हालत दुरुस्त करना भी है।
3. कौशल विकास योजना
गरीबी के खिलाफ लड़ाई और बेहतर रोजगार अवसर के लिए देश के लोगों खासकर युवाओं को कुशल बनाने के मकसद से इस योजना की शुरुआत हुई थी। ताकि युवाओं को हुनमंद बनाया जा सके। 15 जुलाई, 2015 को इसकी शुरुआत करते हुए पीएम ने कहा कि अगर देश के लोगों की क्षमता को समुचित और बदलते समय की आवश्यकता के अनुसार कौशल का प्रशिक्षण देकर निखारा जाता है तो भारत के पास दुनिया को चार से पांच करोड़ कार्यबल उपलब्ध करवाने की क्षमता होगी। सरकार इसके तहत देश के इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग सेंटर्स को बढ़ावा देने में जुटी है। अब इसका लाभ शहरी और ग्रामीण युवा उठाने भी लगे हैं।
4. स्टैंड अप इंडिया
पांच अप्रैल, 2016 को नोएडा के सेक्टर-62 में इसकी शुरुआत हुई थी। इस स्कीम को लेकर भारत के उद्यमी वर्ग में खासा उत्साह है। इसका उद्देश्य नए उद्यमियों को स्थापित करने में मदद करना है। इससे देशभर में रोजगार बढ़ावा मिलने लगा है। इसका एक मकसद अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति और महिलाओं के बीच उद्यमशीलता को बढ़ावा देना भी है। इय योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपए से 100 लाख रुपए तक की सीमा में ऋण मुहैया कराना है।
5. मुद्रा योजना
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का पूरा नाम माइक्रो यूनिट डेवलपमेंट रीफाइनेंस एजेंसी है। यह योजना अप्रैल, 2015 में शुरू हुई थी। इसके तहत लोगों को अपना उद्यम (कारोबार) शुरू करने के लिए छोटी रकम का लोन दिया जाता है। मुद्रा योजना के तहत 50 हजार रुपए से 10 लाख रुपए तक की सीमा में ऋणों मुहैया कराने का प्रावधान है। इस योजना के दो उद्देश्य हैं। पहला स्वरोजगार के लिए आसानी से लोन देना। दूसरा छोटे उद्यमों के जरिए रोजगार का सृजन करना। सरकार की सोच यह है कि आसानी से लोन मिलने पर बड़े पैमाने पर लोग रोजगार के लिए प्रेरित होंगे। इससे बड़ी संख्या में रोजगार के मौके भी बनेंगे।
6. स्टार्टअप इंडिया
स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया है की घोषणा पीएम मोदी ने 2015 में स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में की और 16 जनवरी 2016 को इसकी स्थापना हुई थी । ये मोदी सरकार द्वारा देश के युवाओं की मदद करने के लिये एक प्रभावी योजना है। ये पहल युवाओं को नवाचार के बल पर उद्योगपति और उद्यमी बनाने का अवसर प्रदान करना है। देश के युवाओं को बैंको के माध्यम से वित्त प्रदान करना जिससे उनकी शुरुआत बेहतर मजबूती के साथ हो ताकि वो भारत में अधिक रोजगार सृजन कर सके।