2009 में केएमपी का काम पूरा होना था लेकिन नौ बाद यह काम पूरा हुआ। केएमपी चालू होने से दिल्‍ली में जाम से लोगों को राहत मिलेगी।
नई दिल्ली। पीएम मोदी ने सोमवार को गुरुग्राम में आयोजित एक कार्यक्रम में कुंडली-मनेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे (KMP) का उद्घाटन किया। एक्सप्रेस के चालू होने से अब देश की राजधानी दिल्ली को बाहर से आने वाले वाहनों से राहत मिलेगी। साथ ही प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी। इसके अलावा पीएम से आज श्री विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी का शिलान्यास और बल्लभगढ़-मुजेसर मेट्रो की शुरुआत भी की।
270 किमी एक्सप्रेस-वे का काम पूरा
गुरुग्राम में एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि इस एक्सप्रेस-वे पर 12 साल से काम चल रहा था। इसे नौ साल पहले तैयार होना था। लेकिन पहले की सरकार के तौर-तरीके ने एक्सप्रेस वे को पूरा नहीं होना दिया। इसका इस्तेमाल कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान होना था लेकिन पिछली सरकार इस परियोजना को अटकाती रही। उन्होंने कहा कि जब एक्सप्रेस-वे की शुरुआत हुई तो बजट काफी कम था, लेकिन काम लटकने की वजह से दाम बढ़ता गया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के चारों तरफ 270 किलोमीटर एक्सप्रेस-वे के जाल का काम पूरा हो गया है। साथ ही बल्लभगढ़ भी मेट्रो के नक्शे पर आ गया है। उन्होंने कहा कि अभी देश में रेलवे-हाइवे कॉरिडोर पर काम चल रहा है।
दिल्ली में घटेगा प्रदूषण
केएमपी न होने के कारण दिल्ली में बड़ी गाड़ियों के प्रवेश से प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। इसे रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट सहित एनजीटी भी कई हिदायतें जारी कर चुका है। केएमपी एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद दिल्ली में प्रदूषण स्तर नीचे जाने की संभावना है क्योंकि 50 हजार से ज्यादा ट्रकों व अन्य बड़ी गाड़ियों को दिल्ली पारकर पड़ोस के राज्यों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राष्ट्रीय राजधानी में घुसने वाले ट्रकों को एक बाइपास रास्ता मिल जाएगा। इन रास्तों से अब ट्रकों को हरियाणा, राजस्थान, यूपी जाने के लिए दिल्ली में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस एक्प्रेसवे का 53 किलोमीटर हिस्सा पहले से चालू है लेकिन सोमवार को पूरी सड़क का उद्घाटन होने के बाद कुल 136 किलोमीटर लंबे रूट पर ट्रैफिक शुरू हो जाएगा।
सुविधाओं की भरमार
छह लेन के केएमपी एक्सप्रेसवे पर पार्किंग की जगह, पेट्रोल स्टेशन, पुलिस थाने, एक ट्रॉमा सेंटर, हेलीपैड, जलपान गृह और मनोरंजन केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। इस रूट पर आठ छोटे और छह बड़े पुल बनाए गए हैं। इसके साथ ही चार रेलवे ब्रिज, 34 अंडरपास और 64 पैदल यात्री क्रॉसिंग की सुविधाएं भी मुहैया कराई गई हैं।