सीमा विवाद को लेकर डोकलाम जैसी स्थिति पैदा न हो, इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग अपनी अपनी सेनाओं को निर्देश देंगे
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दो दिनों के चीन दौरे में दोनों देशों के सबसे बड़े विवाद को सुलझाने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। दशकों पुराने सीमा विवाद को लेकर डोकलाम जैसे सैन्य गतिरोध की स्थिति आगे पैदा न हो, इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी अपनी सेनाओं को रणनीतिक दिशानिर्देश जारी करेंगे।
भारत-चीन की दोस्ती से टेंशन में पाकिस्तान
मोदी और शी के बीच चीन के वुहान शहर में शनिवार को संपन्न हुई अनौपचारिक वार्ता के दौरान भारत और चीन ने अफगानिस्तान में एक संयुक्त आर्थिक परियोजना पर काम करने को लेकर सहमति जताई। हालांकि सूत्रों ने परियोजना के बारे में विस्तृत विवरण नहीं दिया इस। मगर कदम से बीजिंग के हमेशा के सहयोगी और नई दिल्ली के धुर विरोधी पाकिस्तान परेशान हो सकता है, क्योंकि दक्षिण एशिया के संकटग्रस्त देशों में भारत की मौजूदगी उसे अच्छा नहीं लगता है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच रूखा संबंध रहा है और चीन उनके बीच अमन स्थापित करने में बिचौलिए की भूमिका निभाना चाहता है।
सीमा विवाद सुलझाने के लिए कोशिश होगी तेज
भारत के विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि मोदी और शी का मानना है कि दोनों देशों की ओर से सीमा वार्ता को लेकर विशेष प्रतिनिधियों को उचित, तर्कसंगत और आपस में स्वीकार्य समाधान तलाशने के लिए अपने प्रयास तेज करने होंगे। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने के लिए भारत-चीन सीमा क्षेत्र में अमन व शांति बनाए रखने की अहमियत पर बल दिया।
दोनों नेता अपनी सेना को देंगे निर्देश
भारत के विदेश सचिव ने कहा, 'इसके लिए उन्होंने अपनी-अपनी सेना को सीमा मामलों के प्रबंधन में आपसी विश्वास बहाली के विभिन्न उपायों को अमल में लाने की दिशा में भरोसा व तालमेल बनाने के लिए एक-दूसरे से संवाद बढ़ाने का रणनीतिक निर्देश जारी किया। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने अपनी-अपनी सेना को दोनों पक्षों के बीच सहमति के आधार पर विश्वास बहाली के विभिन्न उपायों को शीघ्र अमल में लाने का निर्देश दिया। दोनों पक्षों के बीच सीमा क्षेत्रों की घटनाओं को रोकने के लिए आपसी व समान सुरक्षा के सिद्धांत को अमल में लाने, मौजूद संस्थागत व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने और सूचना साझा करने के तंत्र को लेकर सहमति बनी।
युद्ध के बाद बिगड़े थे हालात
भारत और चीन के बीच काफी समय से सीमा विवाद एक गंभीर मुद्दा रहा है, जिसे लेकर 1962 में दोनों देशों में युद्ध भी हुआ और आपस में अविश्वास बना रहा है। पिछले साल 2017 में भारत-चीन सीमा क्षेत्र में सिक्किम के डोकलाम में दोनों देशों की सेनाओं के बीच 73 दिनों तक गतिरोध बना रहा है। अगस्त में बातचीत के बाद गतिरोध दूर हुआ था। इस बीच भारत-चीन शिखर वार्ता के दौरान एक बड़ा फैसला अफगानिस्तान में भारत-चीन आर्थिक परियोजना को लेकर हुआ है, जिसपर दोनों देशों ने काम करने पर सहमति जताई है।