जब भी कोई शासकीय कार्यक्रम होता है, तब राष्ट्रपति सबसे आखिरी में पहुंचते हैं और सबसे पहले कार्यक्रम से निकल जाते हैं।
नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अब हमारे बीच नहीं रहे। वाजपेयी का 93 साल की उम्र में गुरुवार को निधन हो गया। वह लंबे से बीमार चल रहे थे, जिसके चलते उनको हॉस्पिटल में जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया था। शुक्रवार को समृति स्थल पर वाजपेयी का नम आंखों के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस बीच लोगों में एक बात जो चर्चा का विषय रही, वह थी वाजपेयी के अंतिम संस्कार में राष्ट्रपति का सबसे बाद में पहुंचना। दरअसल, राष्ट्रपति रामनाथ कोंविद सबसे अंत में वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने पहंचे। पूरे घटना को देख रहे लोगों के जहन सवाल था कि आखिर इसके पीछे वजह क्या है?
राष्ट्रपति सबसे आखिरी में पहुंचते हैं
आपको बता दें कि जब भी कोई शासकीय कार्यक्रम होता है, तब राष्ट्रपति सबसे आखिरी में पहुंचते हैं और सबसे पहले कार्यक्रम से निकल जाते हैं। इसी प्रोटोकॉल के चलते शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोंविद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को शासकीय श्रद्धांजलि देने सबसे अंत में पहुंचे। आपको बता दें कि राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च नागरिक होता है। राष्ट्रपति को देश का प्रथम पुरुष भी कहा जाता है। यही कारण है कि उनका उनका स्थान देश में सर्वोपरी रखा गया है।
प्रधानमंत्री करते हैं इनकी अगुवाई
जबकि किसी भी कार्यक्रम में जहां प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति और नेतागण मौजूद होते हैं तो राष्ट्रपति वहां सबसे आखिरी में पहुंचते हैं। यही नहीं जब तक राष्ट्रपति कार्यक्रम स्थल पर रहते हैं तब तक अन्य नेता वहां से नहीं जा सकते। राष्ट्रपति के बाद यही सम्मान देश के उपराष्ट्रपति को मिला है। खुद प्रधानमंत्री इनकी अगुवाई करते हैं।