जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में एक आत्मघाती हमलवार ने सीआरपीएफ जवानों को निशाना बनाया।
नई दिल्ली। जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में एक आत्मघाती हमलवार ने सीआरपीएफ जवानों को निशाना बनाया। गुरुवार को हुए इस आत्मघाती हमले में भारत के 42 जवान शहीद हो गए। फिदायिन ने पुलवामा जिले में श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर अपनी विस्फोटकों से लोड एसयूवी सीआरपीएफ की बस से टकरा दी, जिसने विस्फोट कर दिया। 1989 में आतंकवाद के सिर उठाने के बाद से हुए अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमले की निंदा करते हुए भाजपा ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही है। ऐसे में माना जा रहा है कि मोदी सरकार एक बार फिर सर्जिकल स्ट्राइक टू के माध्यम से दुश्मन को कुचल सकती है। आपको बता दें कि 2016 में उरी में हुए हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को जरूर मुंहतोड़ जवाब दे दिया गया था।
जेईएम ने ली इस नृशंस आतंकी हमले की जिम्मेदारी
इस आतंकी हमले में सीआरपीएफ के कम से कम 42 जवान शहीद हुए हैं। पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने इस नृशंस आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली है और आत्मघाती हमलावर का एक वीडियो जारी किया है जिसे हमले से पहले शूट किया गया था। हमलावर की पहचान कमांडर आदिल अहमद दार के रूप में हुई है। पुलावामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले की सूचना मिलते ही केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ से सीधा राजधानी दिल्ली पहुंचे। राजनाथ सिंह ने तत्काल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुला पूरे मामले की जानकारी ली। वहीं, राजनाथ सिंह आज यानी शुक्रवार केा श्रीनगर पहुंच कर घटना का जायजा लेंगे। दूसरी तरफ एनएसए अजीत डोवाल पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
सर्जिकल स्ट्राइक की प्लानिंग?
आपको बता दें कि 2016 में मोदी सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल की निगरानी में हुई इस सर्जिकल स्ट्राइक में भारतीय जवानों ने पाकिस्तान में घुस कर दुश्मन का सिर कुचला था। अजीत डोवाल ने ही इस पूरे ऑपरेशन का ब्लूप्रिंट तैयार किया था। यह सैन्य अभियान इतना गुप्त रखा गया था कि पाक खुफिया तंत्र तक को इसकी जानकारी नहीं लगी थी।