Highlights -वर्तमान में भर्ती मरीजों की संख्या 924 है -कोरोना वायरस से ठीक हुए लोगों को दोबारा संक्रमण नहीं हो सकता है -डब्ल्यूएचओ समेत अन्य विशेषज्ञ ने ठीक हो रहे लोगों में दोबारा संक्रमण होने से इंकार भी नहीं कर रहे हैं।
नई दिल्ली. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की वजह से देश में लगातार संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। शनिवार को यह संख्या बढ़कर 1047 गई है। वहीं अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल मरीजों की संख्या 1047 हो गई है। इसमें 95 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। वर्तमान में भर्ती मरीजों की संख्या 924 है। वहीं एक एेसी खबर भी है जिससे ये इंकारा नहीं जा सकता है कि कोरोना वायरस से ठीक हुए लोगों को दोबारा संक्रमण नहीं हो सकता है। डब्ल्यूएचओ समेत अन्य विशेषज्ञ ने ठीक हो रहे लोगों में दोबारा संक्रमण होने से इंकार भी नहीं कर रहे हैं। हालांकि डब्ल्यूएचओ ने कोविड-19 के संक्रमित हुए अधिकतर लोगों के दोबारा इसकी चपेट में आने पर ठीक होने की संभावना और इसका असर कम होने की बात कही है।
दोबारा भी हो सकता है संक्रमण
इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका स्थित रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) का अब तक का अध्ययन बताता है कि कोविड-19 के प्रति इंसानी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को लेकर कोई एक मत नहीं है। एमईआरएस-कोव संक्रमण वाले रोगियों के केस में पाया गया था कि एक बार रोगियों के रोग मुक्त होने के बाद जल्द उनके बीमार पड़ने की आशंका नहीं थी, लेकिन कोविड-19 के केस में इस तरह की प्रतिरोधक क्षमता विकसित होगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं।
बढ़ सकता है बीमार होने का खतरा
ह्यूस्टन में टेक्सास यूर्निवर्सिटी के पीडियाट्रिक (बाल रोग) मेडिकल स्कूल में सहायक प्रोफेसर डॉ. पीटर जंग का मानना है जैसे ही फ्लू के संक्रमण से व्यक्ति में दिखने वाले लक्षण और वायरस की प्रकृति में बदलाव हुआ वैसे ही कोविड-19 का वायरस भी खुद में बदलाव ला सकता है। ऐसे में वायरस की बदलती प्रकृति शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करते हुए उसे अतिसंवेदनशील बना सकती है, जिससे बीमार होने का खतरा बढ़ सकता है।
कोरोना ठीक होने के बाद दोबार हुआ बुखार
जापान के समाचार टेलीविज़न चैनल एनएचके के अनुसार ये व्यक्ति कोविड 19 से पूरी तरह ठीक हो गए थे और टेस्ट नतीजे नेगेटिव आने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई थी। वो सामान्य ज़िंदगी में लौट आए थे और आम दिनों की ही तरह सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने लगे थे, लेकिन कुछ दिनों बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें बुख़ार आ गया।