विविध भारत

सबरीमला मंदिर के बाहर भारी विरोध जारी, भीतर जाने से रोकी गई महिला पत्रकार

सबरीमला मंदिर के भीतर महिलाओं के प्रवेश को लेकर हो रहे विरोध के बीच बृहस्पतिवार को दिल्ली की एक महिला पत्रकार को प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ ने आगे बढ़ने नहीं दिया।

less than 1 minute read
900 सालों से चली आ रही सबरीमला मंदिर की परंपरा आज सुप्रीम कोर्ट के दखल से टूट सकती है

नई दिल्ली। केरल के मशहूर सबरीमला मंदिर के भीतर महिलाओं के प्रवेश को लेकर हो रहे विरोध के बीच बृहस्पतिवार को दिल्ली की एक महिला पत्रकार को प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ ने आगे बढ़ने नहीं दिया।

वहीं, 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के लिए भारत की संवाददाता सुहासिनी राज अपने साथी के साथ पंबा तक पहुंच गईं थी लेकिन गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया और उनके सामने मानव श्रृंखला बनाकर खड़े हो गए।

ये भी पढ़ें

सऊदी अरब पहुंची सबरीमला विवाद की गूंज, महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करने वाला नौकरी से बर्खास्त

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने दोनों पत्रकारों को लौटने पर मजबूर कर दिया। सुहासिनी प्रदर्शनकारियों से कहती रहीं कि वह यहां पूजा करने नहीं बल्कि अपने काम के सिलसिले में आई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, "भक्तों का यह बहुत बड़ा प्रदर्शन था। प्रदर्शनकारी रास्ते में बैठे थे और नारे लगा रहे थे। उसके पास कोई और रास्ता नहीं था और उसे मजबूरन लौटना पड़ा।"

बता दें कि बीते माह सुप्रीम कोर्ट के 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत देने वाले आदेश का विरोध कर रहे कुछ संगठनों और पुलिस के बीच बुधवार को झड़पें हुईं। 28 सितंबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से मंदिर का दरवाजा बुधवार को पहली बार खोला गया।

वहीं, विरोध प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन ने मंदिर परिसर के 30 वर्ग किलोमीटर के दायरे में धारा 144 लागू कर रखी है। जबकि राज्य में हिंदूवादी संगठन के आह्वान पर गुरुवार को राज्य में बंद का आह्वान किया गया है। इसमें शामिल संगठन को भाजपा का समर्थन प्राप्त है।

ये भी पढ़ें

सबरीमला मंदिर मामला: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- श्रद्धालुओं की भावनाएं नहीं देखी गईं
Published on:
18 Oct 2018 12:44 pm
Also Read
View All