
सबरीमला मंदिर मामला: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- श्रद्धालुओं की भावनाएं नहीं देखी गईं
नागपुर। आरएसएस ने 93वां स्थापना दिवस मनाया। समारोह में संघ प्रमुख ने सबरीमला मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। मोहन भागवत ने सबरीमला मंदिर के बारे में कहा कि स्त्री पुरुष समानता अच्छी बात है, लेकिन सालों से चली आ रही परंपरा का सम्मान नहीं किया गया। परंपरा है इसलिए महिलाएं नहीं जाती हैँ। उन्होंने अपने भाषण में कहा सबरीमला के निर्णय का उद्देश्य स्त्री-पुरुष समानता का था, लेकिन क्या हुआ। इतने वर्षों से परंपरा चल रही है वह टूट गई, जिन्होंने याचिका डाली वो कभी मंदिर नहीं गए, जो महिलाएं आंदोलन कर रही हैं वो आस्था को मानती हैं। धर्म के मुद्दे पर धर्माचार्यों से बात होनी चाहिए, वो बदलाव की बात को समझते हैं। संघ प्रमुख ने कहा कि ये परंपरा है, उसके पीछे कई कारण होते हैं। कोर्ट के फैसले से वहां पर असंतोष पैदा हो गया है। महिलाएं ही इस परंपरा को मानती हैं लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
राम मंदिर बनना चाहिए- मोहन भागवत
मोहन भागवत ने साथ ही राम मंदिर मुद्दे पर बड़ा बयान दिया। समारोह में उन्होंने कहा राम, "हमारे गौरव पुरुष हैं। उनका स्मारक होना ही चाहिए। सरकार कानून बनाकर मंदिर बनाए। मंदिर जल्द से जल्द बने। उन्होंने कहा, 'यह हिंदू-मुसलमान का मसला नहीं है। यह भारत का प्रतीक है और जिस रास्ते से मंदिर निर्माण संभव है, मंदिर का निर्माण होना चाहिए।'
सबरीमला में सियासी संग्राम जारी
मासिक पूजा के पहले दिन सबरीमला के कपाट खुले लेकिन 10 से 50 साल की महिलाएं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भगवान अयप्पा का दर्शन नहीं कर पाईं। अयप्पा के समर्थकों के सामने पुलिस प्रशासन की नहीं चली। इस लिहाज से संविधान पर आस्था भारी साबित हुई। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ धार्मिक और हिंदूवादी संगठनों ने हड़ताल की घोषणा कर दी है। इस घोषणा से क्षेत्र में तनाव का माहौल पहले की तरह बना हुआ है। तनाव को देखते हुए प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और सबरीमला समरक्षणा समिति ने मध्यरात्रि से 24 घंटे की हड़ताल शुरू करने का आह्वान किया है।
Published on:
18 Oct 2018 10:47 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
