राजनीति में उनकी संघर्ष यात्रा को याद कर रहे हैं भाजपा के वरिष्ठ नेता आशीष सूद
राजनीति में शून्य से शिखर तक की यात्रा करने वाले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना जी का पूरा जीवन हमें 'प्रयोग से सिद्धि' के मार्ग पर चलना सिखाता है। आप ऐसे दूरदर्शी राजनेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने न केवल अनेक जनकल्याणकारी स्वप्न देखे, बल्कि चुनौतियों को स्वीकार करते हुए सटीक रणनीति और अथक प्रयासों से अपने जीवनकाल में ही उन्हें धरातल पर भी उतारा।
इंदिरा जी की हत्या के बाद सन् 1984 के आम चुनाव में कांग्रेस के प्रति लोगों की सहानुभूति के कारण भाजपा की बुरी तरह पराजित हुई थी, तब खुराना जी ने मुझ जैसे लाखों कार्यकर्ताओं के मन में आशा का दीप जलाया और हमने दिल्ली में 'विधायिका की व्यवस्था' के लक्ष्य के साथ नए सिरे से कार्य शुरू किया था। यह उनके कुशल नेतृत्व का ही परिणाम था कि हमें कुछ ही वर्षों में सफलता की किरण दिखने लगी। दिल्ïली में 'विधायिका की व्यवस्था' होने के बाद उन्होंने सशक्त सेनापति की तरह दिल्ली भाजपा को नेतृत्व प्रदान किया और 1993 के विधानसभा चुनावों में हमें सफलता मिली।
नई व्यवस्था के बाद दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री बने खुराना जी को एक योग्य प्रशासक के रूप में सदैव याद किया जाएगा। यातायात व्यवस्था में दूरगामी सुधार के लिए उन्होंने 'दिल्ली मेट्रो' का सपना देखा और अपने कार्यकाल में ही 'शाहदरा से तीस हजारी' तक की प्रथम मेट्रो लाइन (रेड लाइन) का निर्माण भी शुरू करवाया। उनके मुख्यमंत्री बनने से पूर्व दिल्ली सरकार का अपना कोई विश्वविद्यालय नहीं था, सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय थे। उन्होंने गुरु गोविन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय की स्थापना की, जिससे दिल्ली के 100 से अधिक कॉलेज व तकनीकी संस्थान संबद्ध हैं। उनके कार्यकाल में दिल्ली विश्वविद्यालय के अधीन भी एक दर्जन से अधिक नए कॉलेज स्थापित हुए। दिल्ली में अनेक अस्पतालों का निर्माण और नागरिक सुविधाओं के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का श्रेय प्रथम मुख्यमंत्री खुराना जी को जाता है।
मदनलाल खुराना जी के सानिध्य में कार्य कर चुके मेरे जैसे लाखों कार्यकर्ताओं के लिए वे हमेशा प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। उनके विचारों, जीवन आदर्शों और जुझारूपन को प्रयोग रूप में जीवित रखकर दिल्ïली की जनता की सेवा करने का संकल्प ही जन्म जयंती पर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।