जेएनयू छात्र उमर खालिद ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछा है कि क्या वह इस साल स्वतंत्रता दिवस पर इस बात की गारंटी देंगे की सरकार के आलोचकों पर हमले नहीं होंगे।
नई दिल्ली। दिल्ली में जानलेवा हमला होने के एक दिन बाद जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र उमर खालिद ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में यह आश्वासन दे कि सरकार के आलोचकों को निशाना नहीं बनाया जाएगा। बता दें कि यह बाते खालिद ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में कहीं।
खालीद ने कहा, 'मोदीजी, आपने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के लिए सुझाव मांगे है। मेरे पास एक सुझाव है क्या आप अपने संबोधन में यह गारंटी देंगे कि आपकी सरकार और आपकी कई नाकामियों की आलोचना करने वालों पर हमले नहीं होंगे।' आपको बता दें कि प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण के लिए देश के नागरिकों से सुझाव मांगे थे।
मोदी के आग्रह के जवाब में अपनी पोस्ट में जेएनयू छात्र ने कहा कि सोमवार को उन पर किया हमले का उद्देश्य उन्हें डराकर चुप कराना था। खालिद ने आगे लिखा कि क्या स्वतंत्रता का अर्थ यह भी है कि इस देश के नागरिकों को अन्याय के खिलाफ मुखर होने के अपराध के लिए मरने के लिए तैयार होना होगा।
जेएनयू छात्र ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस से दो दिन पहले राष्ट्रीय राजधानी के सर्वाधिक सुरक्षा वाले क्षेत्रों में से एक में एक हथियारबंद हमलावर ने मुझ पर दिन के उजाले में हमला करने की हिम्मत की, जो कानून का डर न होने या सजा न मिलने के विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अगर कल उनके साथ कुछ हुआ तो इसके लिए केवल उस अज्ञात बंदूकधारी को जिम्मेदार नहीं समझें। उन्होंने कहा कि वास्तविक अपराधी वे हैं, जो पद की शक्तियों नफरत, रक्तपात और भय के वातावरण बना रहे हैं। जिन लोगों ने हत्यारों और मॉब लिंचिंग की भीड़ को पूरी तरह से दंडमुक्त माहौल दिया है।
खालिद ने कहा कि पुलिस द्वारा धारा 307 और शस्त्र अधिनियम के तहत अपराध दर्ज करने के बाद भी भगवा एजेंट यह सुझाव देने की कोशिश कर रहे थे कि हमला कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि गौरी लंकेश की हत्या मामले में हुई गिरफ्तारी ने 'हिंदुत्व आतंकवादी संगठनों' का भंडाफोड़ किया था।
खालिद ने कहा आगे कहा कि कल एक बार फिर बड़े-बड़े झूठ और शक्कर से लिपटे जुमलों के साथ डालमिया समूह के लाल किले की प्राचीर से वास्तविक स्वतंत्रता-गरिमा के लिए हमारी लड़ाई और अधिक संकल्प के साथ भगत सिंह और बाबासाहेब अंबेडकर के सपनों को सच्चाई बनाने की बात होगी।